श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित एक सप्ताह का विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। आईक्यूएसी विभाग द्वारा आयोजित ‘ज्ञान-मंथन’ कार्यक्रम में देशभर से 130 से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया।कार्यक्रम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना था। वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. ऋषिना नाथू ने भारतीय गणित के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने शून्य और अनंत की अवधारणा को विस्तार से समझाया। महर्षि पतंजलि संस्कृत प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी ने वैदिक ज्ञान और शिक्षा प्रणाली पर चर्चा की। सुजीत सिंघल ने प्रबंधन शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली के व्यावहारिक उपयोग को समझाया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के. वेंकट रमन ने प्राचीन भारतीय तकनीकों की पुनर्स्थापना पर जोर दिया। डॉ. माया इंगले ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान प्रणाली को शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की। साथ ही, आधुनिक शिक्षण में वैदिक गणित के महत्व को रेखांकित किया। संस्थान के निदेशक एवं आईक्यूएसी चेयरमैन डॉ. जॉर्ज थॉमस ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व एवं सरकार द्वारा इसके प्रचार-प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पारंपरिक एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय को समझने और इसे शिक्षण प्रणाली में लागू करने की ओर यह एक महत्वपूर्ण कदम है। मंच का संचालन श्रुति पुस्तके ने किया। कार्यक्रम की सारांश रिपोर्ट का वाचन आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डॉ. क्षमा पैठणकर ने किया। कार्यशाला का आभार डॉ. मोहिनी थत्ते ने माना। इस अवसर पर मेंनेजमेंट विभागाध्यक्ष (पीजी/यूजी) डॉ. दीपा कटियाल, डॉ. मंदीप गिल, प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मेघा वाय जैन एवं डॉ. कृतिका नीमा द्वारा किया गया।