ग्वालियर शहर से 15 किलोमीटर दूर लाल टिपारा गौशाला में गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे भीषण आग लग गई, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। आग लगने के समय पास के एक बाड़े में करीब एक हजार से अधिक गौवंश मौजूद थे। यह आग गौशाला परिसर में स्थित वैदिक डेस्टिनेशन क्षेत्र में लगी थी, जहां घास के सोफे, झोपड़ियां आदि जलकर पूरी तरह राख हो गए। गौशाला में आग लगने की सूचना वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को दी। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और चार गाड़ियों से पानी की बौछार कर आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि आग से किसी भी गोवंश को कोई नुकसान नहीं हुआ। कर्मचारियों की सतर्कता से गोवंश को सुरक्षित शिफ्ट किया गया जानकारी के अनुसार, लाल टिपारा गौशाला के सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल पर बने टपरे में आग लगी थी। हालांकि, अब तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आग लगते ही उसने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने समय रहते गोवंश को सुरक्षित निकालकर दूसरे बाड़े में शिफ्ट कर दिया। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, जहां दो गाड़ियों से पानी की बौछार कर आग पर काबू पा लिया गया। समय पर फायर ब्रिगेड के पहुंचने से प्रदेश की पहली और एकमात्र आदर्श गौशाला में बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल, आग लगने का कारण बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। वैदिक डेस्टिनेशन क्षेत्र में लगी थी आग लाल टिपारा गौशाला के प्रबंधक महंत ऋषभदेव का कहना है कि, होली का त्योहार नजदीक है, इसलिए गौशाला में गौमैट गुलाल बनाने को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे आग लग गई। गौशाला में फैशनेबल बैठने की विशेष व्यवस्था बनाई गई थी, जो पूरी तरह जलकर राख हो गई। हालांकि, आग में किसी भी गौवंश को कोई नुकसान नहीं हुआ। आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मी ने बताया कि, कंट्रोल रूम को लाल टिपारा गौशाला में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही एक दमकल गाड़ी और अन्य कर्मियों के साथ वह मौके पर पहुंचे। लेकिन आग अधिक फैल चुकी थी, इसलिए तुरंत पानी का छिड़काव शुरू किया गया। इस आग को बुझाने में कुल चार दमकल गाड़ियों का पानी इस्तेमाल करना पड़ा। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन संभावना है कि यह बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी हो। Post navigation Ukraine was once the world’s 3rd largest nuclear power on Earth—here’s why it gave them up WCL की छतरपुर खदान में बड़ा हादसा:रूफ गिरने से 4 कर्मी दबे, माइनिंग सरदार और ओवरमैन समेत अधिकारी शामिल