ठेकेदार ई-टेंडर देकर बाद में ऑनलाइन बोली लगाकर बढ़ा सकते हैं बिड प्रदेश की 55% शराब दुकानों की नीलामी ई-टेंडरिंग से मंगलवार से शुरू होगी। सरकार को अधिक राजस्व मिले इसके लिए ई-टेंडरिंग कम ऑक्शन का भी विकल्प होगा। साथ ही नवीनीकरण और लाटरी से बची दुकानों को नए समूहों में बांट रहे हैं। कई जगह पूरे जिले का भी एक समूह बन रहा है। 21 फरवरी से शराब दुकानों के नवीनीकरण और लाटरी से ठेका देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि रिजर्व प्राइस 20% बढ़ने और जिले में न्यूनतम 75% की जगह 80% का राजस्व लक्ष्य होने के कारण 45% दुकानों के समूह रिन्यू हो सके। अभी तक 2024-25 के 15200 करोड़ राजस्व लक्ष्य के विरुद्ध आबकारी विभाग 13200 करोड़ वसूल चुका है। ऑनलाइन बिडिंग का भी विकल्प – साल 2019 में सीमित स्तर पर आबकारी विभाग ने ऑनलाइन बिडिंग का विकल्प दिया था, पर प्रयोग सफल नहीं रहा था। अब ठेकेदार ई-टेंडर भर पाएंगे, साथ ही ई-टेंडर -ऑक्शन का विकल्प भी ले सकेंगे। इस विकल्प में अधिकतम बिड को बेस प्राइस में लेंगे। 8 मार्च को शाम 5 बजे से इस प्राइस से आगे बिडिंग शुरू होगी। हर ठेकेदार अपने बिड राशि का 0.25 % बढ़ाकर बोली लगा सकेगा। अगले 15 मिनट तक दूसरी बोली लग सकेगी। बोली नहीं लगेगी तो प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। पहले दो चरण में कई जिलों में मिली थी 78 % बोली पहले दो चरणों में कई जिलों में न्यूनतम राजस्व की बोली 80% की बाध्यता होने के कारण ठेके नहीं हो सके। मुरैना-सागर में 78% तो भोपाल में 71% तक राजस्व लक्ष्य के बराबर बोलियां मिली थी। दो चरणों में 930 में से 462 समूह के ही नवीनीकरण हो सके थे। सबसे बड़ा समूह 303 करोड़ रुपए का जिले की 87 शराब दुकानों को 4 समूह में बांटा, सबसे कम 210 करोड़ रुपए का जिले में आबकारी की 87 शराब दुकानों के 4 समूह बनाए गए हैं। यह इसलिए, क्योंकि भोपाल जिले में साल 2025-26 के लिए शराब दुकानों के रिन्यू से 80% राजस्व नहीं मिला। इसमें सबसे कम कीमत का समूह 210 करोड़ रुपए और सबसे बड़ा 303 करोड़ रुपए का है। आबकारी विभाग को उम्मीद है कि चार समूह के लिए 8 से ज्यादा समूह आ सकते हैं। सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा ने बताया कि इस वित्त वर्ष शराब दुकानों से 1073 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य रखा है। पहले चरण में 19 समूह ने ही रिन्यू कराया। इससे 611 करोड़ के ऑफर आए। इसके बाद सिर्फ 6 समूह की लॉटरी आई। यह मिलाकर करीब 73% तक ही राजस्व हो सका। इस कारण सभी के आवेदन रद्द कर दिए गए। अब शहर को चार समूह में बांटा गया है। इनसे अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। समूह क्रमांक-4 सबसे सस्ता समूह है, लेकिन इसमें दुकानों की संख्या चारों समूह में सबसे ज्यादा है। शहर में 87 दुकानों को 35 समूह में बांटा गया था। अब यह सिर्फ 4 समूह में सभी को बांटा गया है। Post navigation खुलासा:जिस महिला से रकम लेकर लौट रहा था फरियादी, उसी के भाई ने कराई थी लूट इंदौर के बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. मोहित भंडारी ने चेताया:मोटापा एक गंभीर बीमारी, सही इलाज से हो सकता है नियंत्रण