खंडवा कलेक्ट्रेट में गुरुवार को एक अनोखी कोर्ट मैरिज हुई। यहां जिला अस्पताल का स्टाफ घराती और बराती दोनों की भूमिका में पहुंचा। दूल्हा और दुल्हन ने जीवन साथी बनने का प्रण किया। एक-दूसरे को माला पहनाई। दूल्हे ने मंगलसूत्र बांधा और चंद मिनट में विवाह कार्यक्रम संपन्न हो गया। दरअसल, जिला अस्पताल में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर अचला मेश्राम ने अस्पताल में ही पूर्व कर्मचारी रहे हरीश धामेजा से इंटरकास्ट मैरिज की है। हरीश फिलहाल कियोस्क सेंटर चलाते हैं। अस्पताल में नौकरी के दौरान उनकी दोस्ती हो गई थी। परिवार की सहमति के बाद दोनों ने शादी का फैसला लिया। गुरुवार को वे एडीएम कोर्ट पहुंचे और शादी की कानूनी रस्में पूरी की। इस दौरान अपर कलेक्टर काशीराम बड़ौले मौजूद रहे। दुल्हन की सुपरवाइजर ने निभाया मां का फर्ज
कानूनी विवाह प्रक्रिया के दौरान दुल्हन के माता-पिता मौजूद नहीं थे। इस दौरान दुल्हन की मां का फर्ज उनकी सुपरवाइजर और जिला अस्पताल की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर रेणुका मेलुंदे ने निभाया। मेलुंदे ने कहा कि जाति का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। शादी फंक्शन में बहुत खर्च होता है, इस पर प्रतिबंध होना चाहिए। दूल्हा-दुल्हन ने स्वतंत्र और नौकरी पेशे से होकर यह फैसला लिया, जो कि स्वागत योग्य है। दुल्हन बोली- गरीबों की मदद करना चाहिए
दुल्हन अचला मेश्राम ने कहा कि इस दौर में लोग शादी-पार्टी में खूब खर्चा करते हैं। इससे अच्छा है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद कर दी जाए। मेरा विचार यही है कि दान, दक्षिणा के माध्यम से गरीब लोगों की मदद करें तो अच्छा होगा।