मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति ने कालजयी कवि स्मरण श्रृंखला की 101वीं कड़ी में संत कवि नामदेव को याद किया। समिति ने उनके चित्र का विमोचन भी किया। प्रचार मंत्री हरेराम वाजपेयी ने बताया कि नामदेव का जीवन विट्ठल भक्ति और मानव कल्याण को समर्पित था। वे अभंग भक्ति काव्य रचने वाले वैष्णव बारकरी सम्प्रदाय के प्रमुख संत थे। उनके काव्य में सामाजिक समरसता और ईश्वर भक्ति का संगम था। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने संत नामदेव के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। सुनीता फड़नीस ने उन्हें बाह्य आडंबर के विरोधी और परोपकारी बताया। अरविंद जोशी ने पर्यावरण के प्रति उनकी आस्था का वर्णन किया। डॉ. वसुधा गाडगिल ने अभंग भक्ति पर प्रकाश डालते हुए दो पद प्रस्तुत किए। राधिका इंगले ने भक्त जैनाबाई का प्रसंग साझा किया। डॉ. अंतरा करवडे ने पंढरपुर से जुड़े संस्मरण सुनाए। डॉ. पुष्पेंद्र दुबे ने संत ज्ञानेश्वर के साथ उनके भारत भ्रमण की चर्चा की। सभागार विट्ठला के जयकारों से गूंज उठा। अरविंद ओझा, अनिल भोजे, अमरसिंह, राघवेंद्र दुबे, सुधीर लोखंडे, जितेंद्र मानव, नयन राठी और विजय खंडलेवाल समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन राजेश शर्मा के आभार माना। Post navigation क्षत्रिय समाज के खिलाफ बयान पर दतिया विधायक का यू-टर्न:राजेंद्र भारती ने वीडियो जारी कर मांगी माफी; क्षत्रिय समाज ने स्वीकारा मंत्री प्रहलाद पटेल के विवादित बयान पर कांग्रेस का विरोध:हरदा में 6 मार्च को ब्लॉक स्तर पर पुतला दहन, 8 को धरना प्रदर्शन