गोम्मटगिरि जम्बर्डी हप्सी स्थित गोवर्धन गोशाला में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के पांचवें दिन संत पं. कमल किशोरजी नागर ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक जीवनशैली में मर्यादा लुप्त होती जा रही है। संत नागर ने मालवी भाषा में कथा का वर्णन करते हुए वात्सल्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जैसे छाछ और दूध को अलग रखा जाता है, वैसे ही सांसारिक जीवन में वात्सल्य और वासना को भी अलग रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि एक ही व्यक्ति के लिए दो अलग दृष्टिकोण होते हैं – जब बच्चा मां की गोद में होता है तो वह वात्सल्य है। कथावाचक ने चिंता व्यक्त की कि आजकल वात्सल्य और वासना का भेद मिटता जा रहा है। इसी कारण छोटी बेटियों के साथ दुराचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने बेटियों को सलाह दी कि वे अपनी सुरक्षा मधुमक्खी की तरह करें, जैसे वह शहद की रक्षा करती है। कार्यक्रम में मालवा-निमाड़ से बड़ी संख्या में गुरु भक्त पहुंचे। आयोजक कैलाश मिश्रा, जगदीश मिश्रा और राजेश मिश्रा ने बताया कि कदम वाटिका में भागवत कथा के साथ मेला भी लगा है, जहां बच्चे झूलों का आनंद ले रहे हैं। भक्तगण कथा श्रवण के साथ-साथ सेवा कार्य भी कर रहे हैं। यातायात व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए युवाओं की अलग-अलग टीम बनाई गई हैं। सरदारसिंह सोलंकी, सोनू मिश्रा, योगेश मिश्रा, विनोद सोलंकी, राधेश्याम पटेल एवं संतोष नीमचा ने बताया कि बताया कि मंगलवार को व्यासपीठ का पूजन मिश्रा परिवार के साथ ही जिला अध्यक्ष श्रवणसिंह चावड़ा, मोती सिंह पटेल, रामस्वरूप गेहलोत, दिनेश गोयल ने किया। विनोद सोलंकी ने बताया कि भागवत कथा 6 मार्च तक दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित होगी। कथा में प्रतिदिन प्रसंगानुसार कलाकारों द्वारा चरित्र-चित्रण की प्रस्तुतियां भी दी जा रही हैं।