ग्वालियर में आज यूनेस्को टीम सरोद घर का भ्रमण करेगी विश्वप्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने भास्कर से विशेष बातचीत में कहा, मुझे देशभर में प्यार मिला लेकिन मेरे अपने प्रांत में नहीं। तानसेन शताब्दी समारोह में भी नहीं बुलाया गया। इससे मेरा मन दुखी है, मैंने मप्र के सीएम को पत्र लिखा लेकिन वहां से मिलने का समय नहीं मिला। रविवार को ग्वालियर पहुंचे उस्ताद अमजद अली खान ने कहा, इस सरोद घर को फकीरों का टीला कहिए। मेरे वालिद, उनके वालिद, और फिर मैंने इसी आंगन में संगीत सीखा। बिस्मिल्ला खान साहब से लेकर पं. भीमसेन जोशी तक यहां बैठे हैं। जब सिंधिया स्कूल दुर्ग के प्राचार्य ने अब्बू से मुझे स्कूल में दाखिला दिलाने को कहा, तो उन्होंने साफ कह दिया- अगर ये पढ़ेगा, तो सरोद कौन बजाएगा? मैंने सिर्फ 5वीं तक पढ़ाई की और फिर फकीर की तरह संगीत को अपना जीवन बना लिया। गौरतलब है कि यूनेस्को की टीम सोमवार को सरोद घर भ्रमण के लिए आने वाली है। इस दौरान उस्ताद सरोद वादन भी करेंगे। ग्वालियर में संगीत के प्रति लोगों का रुझान कम होने पर उन्होंने कहा, यहां के लोगों की दिलचस्पी संगीत से अधिक राजनीति में नजर आती है। संगीत एक अंधेरी गुफा है। इसमें 100 लोगों का काफिला अगर प्रवेश करे तो उजाला मुश्किल से चार से पांच लोगों को नजर आता है। आज के युवा संगीत को रिस्क मानने लगे हैं। Post navigation ब्यावरा में बड़ी कार्रवाई:तीन डीएफओ, 20 रेंजर व 300 जवानों ने 30 जगह मारा छापा, एक करोड़ की सागौन जब्त Top US officials suggest Zelenskyy may have to quit to reach peace deal