अपने लुक और कार्य से ही सबका दिल जीत लेते है डॉ मोहन यादव महाकाल की नगरी उज्जैन का देश के नायकों में हमेशा विशिष्ट स्थान रहा है। यहां महाभारत काल में विद और अनुविंद व सम्राट विक्रमादित्य जैसे आदर्श नायक हुए । कालीदास,बाणभट्ट,वराह मिहिर,राजशेखर,पुष्पदंत,शंकराचार्य,वल्लभाचार्य,भर्तृहरि,दिवाकर और कात्यायन जैसे विद्वान व दुर्गादास राठौड़ जैसे महायोद्धा का भी उज्जैन से संबंध रहा है। मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी इसी पवित्र धरा के रहवासी हैं। राजनेता की सफलता का पैमाना उसकी लोकप्रियता का दायरा है। इसकी व्यापकता ही उसे नायक से जननायक बनाती है। मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी ऐसे ही बिरले राजनेताओं में एक हैं। जिन्होंने करीब सवा साल के अपने शासनकाल में कठोर परिश्रम,मधुर व्यवहार व जनहितैषी कामकाज की बदौलत मध्य प्रदेश ही नहीं दीगर राज्यों के लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बनाई। भारतीय जनता पार्टी ने बीते एक साल के दौरान चुनाव वाले सभी राज्यों में बतौर स्टार प्रचारक डॉ यादव का उपयोग किया। खास बात यह कि अधिकांश चुनाव में डॉ यादव का सक्सेस रेट 80 से 90 फीसद रहा और वह किंग मेकर राजनेता के तौर पर उभरे। डॉ यादव की लोकप्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण मध्य प्रदेश हैं। जहां उनकी पार्टी ने न केवल लोकसभा की सभी 29 सीटें जीती,बल्कि विधानसभा की तीन सीटों के लिए हुए उपचुनाव में दो सीटें कांग्रेस से छीनने में भी सफल रही। बतौर मुख्यमंत्री डॉ यादव के चयन के वक्त उनकी तुलना तब के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से की गई। सवाल अनुभव को लेकर भी उठे। एक ओर तीन बार के विधायक व चौहान मंत्रिमंडल में बतौर उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉ मोहन यादव तो दूसरी ओर’मामा’का 16 साल की सत्ता का अनुभव,लेकिन महज सवा साल में ही डॉ.यादव अपनी लाइन बड़ी कर पाने में सफल रहे। 26 साल बाद छिंदवाड़ा में भाजपा को मिली सफलता इसका एक बड़ा उदाहरण है। कांग्रेस नेता कमलनाथ के इस ‘दुर्ग’ को भेद पाना आसान नहीं था,लेकिन डॉ मोहन यादव के कार्यकाल में यह संभव हो सका। चुनाव तब ही जीते जाते हैं,जब मतदाता अपने नेता व राजनीतिक दलों की नीतियों व कामकाज से खुश हो। मध्यप्रदेश में लगभग शत -प्रतिशत व दीगर राज्यों में 90 फीसद तक डॉ यादव का चुनावी सक्सेस रेट यह बताने के लिए काफी है कि वे अल्प समय में लोगों को अपना बनाने में सफल रहे। सरकार की जनहितैषी नीतियों के अलावा मुखिया की ओजस्वी भाषण शैली भी आम आदमी को आकर्षित करती है। डॉ यादव की वाकशैली का ठेठ मालवी अंदाज भी लोगों को बहुत भाता है। उनके भाषण में धर्म,आध्यात्म का पुट है तो सीधे-सरल तरीके से बात कहने का लहजा भी। राज्य विधानसभा हो या कोई सार्वजनिक मंच। वे अपनी बात को बेबाकी से रखते हैं। राजनीतिक भाषणों में भी वह अपने आराध्य का स्मरण करना नहीं भूलते। वह स्वयं’मोहन’हैं और महाकाल का आशीर्वाद उनकी ताकत। धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में यदि वे कहते हैं -हमने पवित्र नगरों में शराबबंदी कर दी। अन्य जगह भी शराबबंदी की मांग है,लेकिन हमें सरकार भी चलानी है। मांसाहार को लेकर वह कहते हैं-“हम तो चाहते हैं छोड़ दो लेकिन अब लोगों का मुंह तो पकड़ नहीं सकते। जिसे जो खाने की आदत है,वह खाएगा,लेकिन फिर भी इतना किया कि मांस ढक कर बेचो। दिखावा क्यों करना?” सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने के मामले में भी उनका अंदाज दो टूक वाला रहा है। कुशल राजनेता वही जो जनभावना का आदर करे। लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि उनका अपना मुखिया,प्रतिनिधि उनके अपने बीच से ही है। जो उनकी तकलीफों को समझें व इन्हें दूर करने में सहायक हो। प्रदेश का मुखिया होने के नाते डॉ यादव ने इस मर्म को बखूबी समझा। अब तक के अल्प शासनकाल में ही वह आमजन के मददगार बन गए। जनहितैषी कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के कल्याण के काम वह निरंतर कर रहे हैं। गरीब,मध्यमवर्गीय महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने उन्होंने लाड़ली बहना जैसी योजना को निरंतरता प्रदान की तो फसल पर बोनस राशि,सोलर पंप जैसी योजना लाकर किसानों का भी खूब ध्यान रखा है। कृषि प्रधान राज्य में खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में उन्होंने अब तक जो कदम उठाए गए,वे अधिक व्यावहारिक कहे जा सकते हैं। इसी तरह, स्व-सहायता समूहों को आगे बढ़ाकर इनसे जुड़ी लाखों महिलाओं को आर्थिक तौर पर समृद्ध बनाने की दिशा में भी प्रयास निरंतर जारी है।औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन के जतन वह कर ही रहे हैं। वहीं, सरकारी महकमों के रिक्त पदों पर भर्ती शुरू कर उन्होंने बेरोजगार युवाओं को भी राहत दी है।खास बात यह कि डॉ यादव का जोर स्व प्रचार से ज्यादा वास्तविक कामकाज पर है। सुशासन के मापदंड पर मध्य प्रदेश की स्थिति अन्य राज्यों से बेहतर कही जा सकती है। जो सत्ता प्रमुख के स्पष्ट विजन व दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने प्रशासनिक कसावट के जरिए न केवल कल्याणकारी योजनाओं को गति दी,बल्कि समस्यामूलक मामलों में भी त्वरित निराकरण की कार्य पद्धति को विकसित किया। सीएम हेल्प लाइन इसका एक बड़ा उदाहरण है। ऐसे सभी मामलों में नौकरशाही पर शिकंजा कस डॉ यादव ने आमजन को राहत दी। ब्यूरोक्रेसी पर मजबूत पकड़ के मामले में वह अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों से कहीं आगे नजर आते हैं। सत्ता के साथ संगठन से उनका बेहतर समन्वय है। खास बात यह कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन पर जो भरोसा जताया,इस पर वह अब तक सौ फीसद खरे साबित हुए। इसी खूबी के चलते वह शीर्ष नेतृत्व से लेकर एक आम कार्यकर्ता तक के चहेते नेता बन गए हैं। अन्य राज्यों के अपने समकक्षों में भी वह लोकप्रिय हुए हैं। डॉ यादव को उनके साठवें जन्मदिन के मौके पर हार्दिक शुभकामनाएं,बधाई। बाबा महाकाल का आशीर्वाद उन पर सदैव बना रहे। (रवि अवस्थी) Post navigation अपराधिक न्याय व्यवस्था को और अधिक त्वरित , सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने हेतु सभी स्तंभ एक मंच पर Dr. Mohan Yadav wins everyone’s heart with his look and work.