शाहरुख-संग-काम-करने-के-सवाल-पर-सुचित्रा-कृष्णमूर्ति-बोलीं:डेब्यू-फिल्म-और-मैरिज-के-सवालों-से-आजादी-चाहती-हूं;-लॉन्च-किया-‘वंदे-मातरम’-सॉन्ग

अभिनेत्री, गायिका, लेखिका और पेंटर सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने हाल ही में देशभक्ति गीत ‘वंदे मातरम’ लॉन्च किया है। इसे 1870 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है और स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा दिया है। सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने इस गीत को अपने अंदाज में गाया है। हाल ही में दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान सुचित्रा ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर बात की। शाहरुख खान के साथ ‘कभी हां कभी न’ जैसी फिल्म में काम कर चुकी सुचित्रा कृष्णमूर्ति अब इस फिल्म के बारे में बात करने से बचती हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अपनी डेब्यू फिल्म और मैरिज के सवालों से आजादी चाहती हैं। आपके लिए ‘वंदे मातरम’ क्या है? वंदे मातरम मेरे लिए फ्रीडम है। इस गीत से एक नई क्रांति आई। इसे 1870 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है और स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा दिया है। मैं जब भी वंदे मातरम का वर्जन सुनती थी तब मुझे लगता था कि इतना सुंदर शब्द है, इसे लोग इतने एग्रेसिव से क्यों गा रहे हैं। मैंने इसे अलग तरीके से पेश किया है ताकि यह ना लगे ही हम हमेशा जंग के ही मैदान में खड़े हैं। आपको कब लगा कि वंदे मातरम को एक अलग अंदाज में पेश करना है? कई सालों से सोच रही थी, लेकिन किसी ना किसी वजह से लेट होता गया। जब इसकी तैयारी शुरू की तो म्यूजिक अरेंजर रोहन से सुझाव दिया कि इसे 26 जनवरी के आस पास करते है, लेकिन मुझे 15 अगस्त को ही ध्यान में रखकर इसे रिलीज करना था। हमने इसकी तैयारी शुरू की और स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले 14 अगस्त को ही अपने यूट्यूब चैनल पर रिलीज कर दिया। आप म्यूजिक इंडस्ट्री से काफी समय से जुड़ी हैं, अब क्या बदलाव देखती हैं? मैंने यह गाना खुद रिकॉर्ड और कंपोज किया। म्यूजिक वीडियो भी खुद ही बनाई है। इसे मैंने खुद अपने चैनल पर रिलीज किया। मुझे किसी म्यूजिक कंपनी पर निर्भर नहीं होना पड़ा। मेरी खुद की कॉपीराइट है। आगे अगर इसका 10 वर्जन भी निकालूं तो मुझे किसी से परमिशन लेने की जरूरत नहीं है। यह सबसे बड़ा बदलाव आया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि म्यूजिक कंपनियां पैसे ही नहीं देती हैं। मैंने सोचा कि क्यों ना अपने प्लेटफार्म पर रिलीज किया जाए। आप अभिनेत्री के साथ -साथ सिंगर, कंपोजर, लेखक और पेंटर भी हैं, दिल के करीब सबसे ज्यादा क्या है? मेरे दिल के सभी करीब है। मैं क्रिएटिव आर्टिस्ट हूं। हर काम पूरे जुनून के साथ करती हूं। मैंने एक किताब ‘ड्रामा क्वीन’ लिखी है। उस पर प्ले किया। बचपन से गा रही हूं। उस समय बहुत सारे प्ले किए। किताबें लिखना और पेंटिंग करना बेटी के पैदा होने के बाद शुरू की। उस समय मैंने काम करना छोड़ दिया था और घर पर रहती थी। घर पर खाली बैठे मुझे अच्छा नहीं लगता था। तभी मैंने ब्लॉग लिखना और पेंटिंग करना शुरू कर दिया था। बचपन में जब आप सिंगिंग कर रही थीं, तब एक्टिंग के लिए किसने प्रेरित किया था? सबकुछ अचानक ही शुरू हो गया था। मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे। उसके बाद मैंने दूरदर्शन के शो ‘चुनौती’ में काम किया। उसके बाद साउथ की फिल्मों के ऑफर आने लगे। बहुत लोगों को लगता है कि मैंने चेन्नई या फिर हैदराबाद की रहने वाली हूं। मेरी मातृभाषा तेलुगु है, इसलिए लोगों को ऐसा लगता है, लेकिन मेरी पैदाइश मुंबई की है। पूरी जिंदगी यहीं रही हूं। अपने बड़ी खूबसूरत फिल्म शाहरुख खान के साथ ‘कभी हां कभी ना’ .. ? लेकिन, प्लीज उस फिल्म के बारे में कोई सवाल मत कीजिए। मैं बहुत बोर हो चुकी हूं। मैं अपनी डेब्यू फिल्म और मैरिज के सवालों से आजादी चाहती हूं। ‘कभी हां कभी ना’ के बाद मैंने एक्टिंग को गंभीरता से नहीं लिया। वह मेरी चॉइस थी, इसलिए एक्टिंग में ज्यादा ध्यान नहीं दे पाई।