बॉलीवुड में मनीषा कोइराला ने सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ से डेब्यू किया था। इस फिल्म के बाद एक्ट्रेस ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, अमिताभ बच्चन, कमल हासन और अनिल कपूर जैसे कई बड़े स्टार्स के साथ काम कर चुकी मनीष को जब सक्सेस मिली तब अहंकारी हो गई थीं। उनके करियर में एक ऐसा भी दौर आया जब शराब और ड्रग्स ने उनका करियर बर्बाद कर दिया। अब कैंसर से जंग जीतकर मनीष अपनी पहचान बना रही है। आज मनीषा कोइराला के जन्मदिन पर आइए जानते हैं, उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ और खास बातें.. मनीषा कोइराला के परदादा सड़क पर फूल-माला बेचते थे मनीषा कोइराला के परदादा कृष्ण प्रसाद कोइराला नेपाल के बड़े बिजनेसमैन थे। उनकी नेपाल के जाने माने लोगों में गिनती होती थी। एक बार किसी बात पर नेपाल के राजा से उनकी अनबन हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि उन्हें सबकुछ छोड़छाड़ कर भारत आना पड़ा। भारत आने के बाद उनका संघर्ष बहुत बड़ा था। उन्होंने सड़क पर फूल-माला बेचकर अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया और परवरिश की। न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक एक इंटरव्यू के दौरान मनीषा कोइराला ने बताया था कि बचपन में उनकी दादी बताया करती थीं कि हम किस तरह के संघर्षों के बाद आगे आए हैं। मनीषा ने कहा था- बचपन की मेरी जो यादें ताजा हैं उनमें काफी सारा संघर्ष और ढेर सारा स्वाभिमान है। मैं एक स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से हूं। एक ऐसे परिवार से जिसने स्वतंत्रता के काफी संघर्ष किए और यातनाएं झेली हैं। दादी बताती थीं कि मेरे दादाजी के पास सिर्फ एक जोड़ी कपड़ा हुआ करता था। दिन भर उसी कपड़े को पहनते थे और शाम को वो कपड़ा धुला जाता था। रात में दादा जी गमछे में रहते थे। फटी हुई चप्पल पहनते थे। दादी से इन्हीं बातों को सुन सुन कर बड़ी हुईं। आदर्शवाद,संघर्ष, त्याग ये सब कुछ मैंने अपने बचपन में देखा है। बचपन बेहद औसत और साधारण माहौल में बीता है मनीषा कोइराला ने बनारस के बसंत कन्या महाविद्यालय से शुरुआती पढ़ाई की है। मनीषा कोइराला कहती हैं- बचपन में मेरे घर का माहौल वैसा ही था जैसा एक स्वतंत्रता सेनानी के घर का होता है। घर पर आदर्शवादी लोग, प्रोफेसर, लेखक, बुद्धिजीवी, राजनेता, चिंतक हर तरह के लोग आते थे। हमारे घर में दस से ज्यादा लोग होते थे और पूरे घर का खर्च तीन से पांच हजार रुपए में चलता था। मेरा बचपन बेहद औसत और साधारण माहौल में बीता है। 3 साल की उम्र से ही मणिपुरी, भरतनाट्यम और कथक सीखना शुरू कर दिया मनीषा कोइराला की दादी भरतनाट्यम और मणिपुरी डांसर थीं और मां कथक डांसर थीं। मनीषा कहती हैं- मेरे घर पर शास्त्रीय गीत-संगीत का बड़ा माहौल था। 3 साल की उम्र से ही मैंने मणिपुरी, भरतनाट्यम और कथक सीखना शुरू कर दिया था। स्कूल में खेल कूद में बहुत मन लगता था। हम लोग बॉस्केटबॉल खूब खेलते थे। मैंने ‘स्टेट-लेवल’ पर बास्केटबॉल खेला भी है। हम लोग क्लास ‘बंक’ करके बास्केटबॉल की प्रैक्टिस के लिए चले जाते थे। स्कूल में दोस्तों का टिफिन खाती थीं राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के बाद भी मनीषा कोइराला के घर पर खाने-पीने का माहौल अच्छा नहीं था। मनीषा ने बताया था- मेरे मुकाबले मेरे दोस्तों के टिफिन बहुत अच्छे थे। मेरी टिफिन में बड़ा बोरिंग खाना होता था, जबकि दोस्तों की मां रोटी, अचार, सब्जियां देती थीं। मैं स्कूल जाने के बाद से ही ‘इंटरवल’ का इंतजार करने लगती थी। जैसे ही इंटरवल होता था मैं दोस्तों का टिफिन खाती थी। एक्ट्रेस नहीं, डॉक्टर बनना चाहती थीं इसके बाद की पढ़ाई के लिए मनीषा कोइराला दिल्ली आ गईं। दिल्ली में उनका एडमिशन धौला कुआं के आर्मी पब्लिक स्कूल में हुआ। उस वक्त वो डॉक्टर बनना चाहती थी। मनीषा कोइराला ने कहा था- स्कूल की पढ़ाई में मेरा ध्यान कम ही रहता था। मैं हमेशा किसी सोच में खोई रहती थी, लेकिन अगर कोई मुझे चैलेंज करता था तो मैं अपनी पूरी जान लगाकर उसको गलत साबित कर देती थी। स्कूल में किसी ने मुझे चिढ़ाया कि तुम्हारी साइंस बहुत कमजोर है, तो तुम डॉक्टर नहीं बन सकती हो। यह बात हर वक्त मेरे दिमाग में घूमती रहती थी। मैंने दिन-रात एक कर दिया और नतीजा ये हुआ कि उस बार साइंस में मेरे सबसे ज्यादा नंबर आये। जेब खर्च के लिए मॉडलिंग करना शुरू किया मनीषा कोइराला ने जेब खर्च के लिए मॉडलिंग करना शुरू किया। उसी दौरान उनका एक्टिंग की तरफ झुकाव हुआ। 1989 में नेपाली फिल्म ‘फेरी भेटौला’ से मनीषा कोइराला ने अपने करियर की शुरुआत की थी। बॉलीवुड में एक्ट्रेस ने सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ से डेब्यू किया। शेखर कपूर ने पहले साइन किया था हालांकि इससे पहले शेखर कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म के लिए साइन किया था, लेकिन वह फिल्म नहीं बनी। इसके बाद बोनी कपूर ने वादा किया था कि वो मनीषा को अपनी फिल्म ‘प्रेम’ में संजय कपूर के साथ कास्ट करेंगे। पहले इस फिल्म के लिए तब्बू को अप्रोच किया गया था, लेकिन उन्होंने फिल्म में काम करने से मना कर दिया था। बाद में तब्बू फिल्म में काम करने के लिए राजी हो गई थीं और यह फिल्म मनीषा के हाथ से निकल गई। हालांकि यह फिल्म ‘सौदागर’ के चार साल के बाद रिलीज हुई थी। विधु विनोद चोपड़ा ने ‘टेरिबल एक्ट्रेस’ कहकर रिजेक्ट कर दिया था सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ के बाद मनीषा कोइराला ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस फिल्म के बाद उनके खाते में कई फिल्में आ गईं, जिनमें से कुछ फिल्में सफल नहीं हुई। फिर विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ से मनीषा की किस्मत बदली। इस फिल्म में मनीषा ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने वाली युवती रज्जो का किरदार निभाया था। हालांकि मनीषा इस फिल्म के लिए जब विधु विनोद चोपड़ा से मिलीं तो ऑडिशन देखने के बाद उन्होंने ‘टेरिबल एक्ट्रेस’ कहकर रिजेक्ट कर दिया था। इस बात का जिक्र मनीषा कोइराला ने अपनी किताब ‘हील्ड: हाउ कैंसर गेव मी ए न्यू लाइफ’ (Healed: How Cancer Gave Me a New Life) में किया है। एक्ट्रेस ने इस घटना के बारे में लिखा है- मुझे फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ के लिए दिया अपना स्क्रीन टेस्ट याद है। विधु विनोद चोपड़ा ने मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया था। स्क्रीन टेस्ट के बाद उन्होंने कहा कि तुमने बहुत खराब एक्टिंग की है। तुम एक बुरी एक्ट्रेस हो, मैंने विधु सर से एक दिन का समय मांगा और फिर से ऑडिशन लेने के लिए कहा। उन्होंने मेरी बात मान ली। मैं घर गई और अपने डायलॉग की लगातार प्रेक्टिस करती रही। उसके बाद जब ऑडिशन दिया तब विधु सर ने कहा कि ऐसे ही रोज मेहनत करनी है। सक्सेस मिलते ही अहंकारी हो गई थीं धीरे-धीरे मनीषा कोइराला सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जा रही थी। तभी एक वक्त ऐसा भी आया जब वो अहंकारी हो गई थीं। एक्ट्रेस ने पिंकविला से बातचीत के दौरान कहा था- मुझे ऐसा लगा जैसे मैं थोड़ी अहंकारी हो गई हूं। जब बिना मेहनत के जल्दी सफलता मिलती है तो इस तरह का बदलाव होता है। मुझे लगता है कि ये सब चीजें आपको थोड़ा अहंकारी बना देती हैं। लगने लगता है कि दुनिया आपके इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन मैं वास्तव में ऐसी नहीं हूं। जैसे-जैसे आप मैच्योर होते हैं और जिंदगी में आगे बढ़ते हैं, आपको इसका एहसास होता है। उस समय, मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं पूरे यूनिवर्स का सेंटर हूं। एक दर्जन अफेयर, शादी और तलाक फिर अकेली जिंदगी मनीषा कोइराला जब अपने करियर के पीक पर थी तब उनका नाम कथित रूप से करीब 12 लोगों के संग जोड़ा गया था। जनसत्ता की रिपोर्ट कर मुताबिक बिजनेसमैन सम्राट दहल संग शादी करने से पहले मनीषा का नाम विवेक मुशरान, नाना पाटेकर, डीजे हुसैन, नाइजीरियाई बिजनेसमैन सेसिल एंथनी, आर्यन वैद, प्रशांत चौधरी, ऑस्ट्रेलियाई राजदूत क्रिस्पिन कॉनरॉय के साथ जोड़ा गया था। सबसे ज्यादा चर्चा नाना पाटेकर के साथ रिलेशनशिप को लेकर रही। मनीषा कोइराला ने बिजनेसमैन सम्राट से 2010 में शादी की थी। यह शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली और दोनों के बीच 2012 में तलाक होगा और तब से मनीषा अकेले लाइफ जी रही हैं। शराब और ड्रग्स की लत ने बर्बाद किया करियर कई बेहतरीन फिल्में देने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब मनीषा कोइराला का करियर ढलान पर जाने लगा। इस गम से उबरने के लिए अभिनेत्री ने शराब और ड्रग्स का सहारा लेना शुरू कर दिया। इसका असर उनके काम पर पड़ने लगा। वो नशे में धुत रहा करती थीं, जिसके कारण वो अपने काम से दूर होती चली गईं। जब उन्हें लगा कि संभल जाना चाहिए तो उन्हें कैंसर हो गया। कैंसर को हराकर नए जीवन की शुरुआत 2012 में मनीषा की तबीयत अचानक कुछ ज्यादा खराब हुई। जिसके बाद वह मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती हुईं। इलाज के दौरान उन्हें पता चला कि उनके गर्भाशय में कैंसर है। इस खबर के बाद से तो जैसे मनीषा के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कुछ सोच नहीं पा रही थीं, उन्हें लग रहा था कि ये कैंसर उनको मार डालेगा। हालांकि इसके बाद मनीषा कोइराला ने न्यूयॉर्क में अपना इलाज कराया। लगभग एक साल चले ट्रीटमेंट के बाद कैंसर को हरा दिया। कैंसर से उबरने के बाद मनीषा कोइराला ने अपनी किताब ‘हील्ड: हाउ कैंसर गेव मी ए न्यू लाइफ’ लॉन्च की। किताब के जरिए उन्होंने अपनी आपबीती और संघर्ष की कहानी बताई। OTT पर जबरदस्त एंट्री कैंसर से पीड़ित होने के बाद मनीषा ने फिल्मों से दूरी बना ली थी। उन्होंने 2017 में फिल्म ‘डियर माया’ से बॉलीवुड में वापसी की थी। इसके बाद संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में नरगिस दत्त की भूमिका में नजर आईं, लेकिन सबसे ज्यादा उनकी चर्चा पिछले साल रिलीज वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ को लेकर हुई। इस सीरीज में मनीषा की मल्लिकाजान के रोल में खूब तारीफ हुई। ______________________________________________________________ बॉलीवुड से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें: शोले@50, असरानी ने सुनाई मेकिंग की अनसुनी दास्तान:बोले- खाली थिएटर देख डिप्रेशन में गया, अमजद खान पॉपुलैरिटी पर फूट-फूटकर रो पड़े फिल्म रिलीज हुई तो 2-3 दिनों तक थिएटर खाली पड़े रहे, फिल्म से जुड़े लोगों ने मान लिया कि ये तो फ्लॉप हो गई, लेकिन एक हफ्ते में फिल्म ऐसी चल निकली कि 6 सालों तक सिनेमाघरों में लगी रही। फिल्म देखने वालों का ऐसा हुजूम आया कि टिकट मिलना भी मुश्किल हो गया। उस दौर में ब्लैक में इस कदर टिकटें बिकीं कि टिकट ब्लैक करने वालों ने मुनाफे से घर खरीद लिए। पूरी खबर पढ़ें.. 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