प्रेमानंद-महाराज-से-राज-कुंद्रा-बोले-मेरी-किडनी-ले-लीजिए:शिल्पा-शेट्‌टी-ने-पूछा-राधा-नाम-जप-कैसे-करूं;-संत-ने-दोनों-को-दिया-जवाब

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्‌टी ने गुरुवार को प्रेमानंद महाराज से उनके वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम में मुलाकात की। साथ में पति राज कुंद्रा भी थे। शिल्पा ने संत प्रेमानंद से पूछा- शांति के लिए क्या करूं? महाराज ने कहा- आप सिर्फ राधारानी के नाम का जप करो। ये सब कुछ खुद कर देता है। जीवन को सरल बना देता है। फिर कुछ कठिन नहीं लगता। इस दौरान शिल्पा और राज हाथ जोड़कर संत प्रेमानंद का सत्संग सुनते रहे। करीब 7 मिनट की बातचीत में राज कुंद्रा ने कहा- महाराजजी मेरी इच्छा है कि आप मेरी एक किडनी ले लीजिए। मैं आपको दान करना चाहता हूं। संत प्रेमानंद हंसते हुए बोले- नहीं, नहीं…इसकी जरूरत नहीं है। मेरे पास अगर एक किडनी होगी, तब भी उतने ही दिन चलूंगा, जितनी दोनों नहीं होने पर चलने वाला हूं। यही यथार्थ है…। जब तक भगवान नहीं चाहेंगे, तब तक बुलावा नहीं आएगा। 3 फोटो देखिए… अब विस्तार से पढ़िए… शिल्पा शेट्टी ने प्रेमानंद महाराज से नाम जप के बारे में जानकारी ली। पूछा, राधा नाम जप कैसे करना चाहिए? संत महाराज ने बताया, कैसे भी राधा नाम जप करिए, सारे कष्टों से उन्हें मुक्त करेगा। संतों के वचनों को मानकर अगर चल दिए तो जीवन का बेड़ा पार हो जाएगा। प्रेमानंद ने कहा- एक प्रार्थना रहेगी आपसे कि जीवन भी एक अभिनय है। अभिनय करते हुए जीवन व्यतीत करना है। लेकिन यह जीवन किसके लिए व्यतीत करना है? इस प्रश्न का समाधान करना है। हम धन कमाते हैं, सब कुछ करते हैं, किसके लिए सुविधा के लिए, सुविधा किसके लिए जीवन के लिए। लेकिन जीवन किसके लिए है, प्रश्न यहां खड़ा होता है? अगर जीवन परमात्मा के लिए है, तो जीवन धन्य हो गया। नहीं तो न धन रहेगा, न वैभव रहेगा, न अभिनय रहेगा, न शरीर रहेगा, एक समय वह आने वाला है, जो हमारा नाम चिन्ह भी मिटा देगा। प्रेमानंद बोले- मनुष्य जीवन दिव्यता का क्या फायदा
संत प्रेमानंद ने कहा- मनुष्य जीवन की दिव्यता का फायदा परमात्मा का चिंतन है। जितनी यश कीर्ति है, बड़े-बड़े चक्रवर्ती सम्राट हो गए, आज कौन जानता है? धीरे-धीरे काल के गर्त में सब चला जाता है। इसलिए इस खुशी को खुशी न मानें। वह आखिरी खुशी मानें जिसमें लास्ट समय पर दुःख नाम का लेशमात्र भी न हो। वह भगवान का सिमरन भगवान की प्राप्ति है। राज कुंद्रा ने कहा- मेरी किडनी आपके नाम, शिल्पा भौचक्की रह गईं बातचीत में संत प्रेमानंद महाराज ने बताया, उनकी दोनों किडनियां फेल हो गई हैं और पिछले 10 सालों से वह खराब किडनियों के साथ जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी भी ईश्वर का बुलावा आ सकता है और अब उन्हें इस बात से बिल्कुल भी डर नहीं लगता है। प्रेमानंद महाराज की ये बातें सुनकर राज कुंद्रा तुरंत अपनी इच्छा जाहिर कर दी। राज कुंद्रा ने कहा- मैं पिछले 2 सालों से आपको फॉलो कर रहा हूं। मेरे पास कोई सवाल नहीं है। आप इतने पॉपुलर हैं। जब भी मन में कोई सवाल या डर होता है तो आपके वीडियो से वो सारे जवाब अगले ही दिन मिल जाते हैं। राज ने आगे कहा, आप सबकी इंस्पिरेशन हैं। मैं आपकी तकलीफ को जानता हूं, मैं अगर आपके काम आ पाऊं तो मेरी 1 किडनी आपके नाम। यह सुनकर वहां मौजूद लोग तो हैरान हुए ही, खुद शिल्पा भी कुछ पल के लिए भौंचक्की रह गईं। राज कुंद्रा के ऑफर को प्रेमानंद महाराज ने प्यार और सम्मान की भावना से जोड़ा। कहा, नहीं… नहीं। मेरे लिए इतना ही बहुत है कि आप खुश रहें। उन्होंने कहा- जब तक बुलावा नहीं आएगा, तब तक किडनी की वजह से हम दुनिया नहीं छोड़ेंगे। और सच तो ये कि जब बुलावा आता है तो जाना ही पड़ता है। लेकिन आपका ये सद्भाव हम हृदय से स्वीकार करते हैं। श्रीजी के मंदिर पहुंची शिल्पा, बोलीं- ये दिव्य स्थान संत प्रेमानंद के आश्रम से निकलने के बाद शिल्पा शेट्‌टी और राज कुंद्रा बरसाना में राधा रानी के मंदिर पहुंचे। श्रीजी मंदिर दर्शन किए। उनकी पूजा की। दर्शन कर माथा टेका। मंदिर सेवायत चंदर गोस्वामी ने उन्हें ओढ़नी उढ़ाई। मीडिया से शिल्पा ने कहा- मैं पहली बार राधारानी के पावन धाम आई हूं। मैं बहुत दिन से मथुरा आने की सोच रही थी। अब मुझे यह मौका मिला है। राधारानी के दर्शन कर मेरे मन को सुकून मिला। अद्भुत धाम है। यह स्थान वास्तव में दिव्य और अद्वितीय है। मुझे बरसाना आकर बहुत अच्छा लगा, अब ऐसा लगता है कि यही पर बस जाऊं।
अब प्रेमानंद के वृंदावन पहुंचने की कहानी पढ़िए
प्रेमानंद महाराज के संन्यासी बनने के बाद वृंदावन आने की कहानी बेहद रोचक है। एक दिन प्रेमानंद महाराज से मिलने एक संत आए। उन्होंने कहा- श्री हनुमत धाम विश्वविद्यालय में श्रीराम शर्मा दिन में श्री चैतन्य लीला और रात में रासलीला मंच का आयोजन कर रहे हैं। इसमें आप आमंत्रित हैं। पहले तो प्रेमानंद महाराज ने अपरिचित साधु से वहां आने के लिए मना कर दिया। लेकिन, साधु ने उनसे आयोजन में शामिल होने के लिए काफी आग्रह किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। प्रेमानंद महाराज जब चैतन्य लीला और रासलीला देखने गए, तो उन्हें बहुत पसंद आई। यह आयोजन करीब एक महीने तक चला। चैतन्य लीला और रासलीला समाप्त होने के बाद प्रेमानंद महाराज को आयोजन देखने की व्याकुलता होने लगी। वह उसी साधु के पास गए, जो उन्हें आमंत्रित करने आए थे। उनसे मिलकर महाराज ने कहा- मुझे भी अपने साथ ले चलें। मैं रासलीला देखूंगा और इसके बदले आपकी सेवा करूंगा। इस पर साधु ने कहा- आप वृंदावन आ जाएं। वहां हर रोज आपको रासलीला देखने को मिलेगी। इसके बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन आ गए। वृंदावन आने के बाद महाराज ने खुद को राधा-श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। यहां खुद को राधा-रानी और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। साथ ही भगवद प्राप्ति में लग गए। इसके बाद महाराज संन्यास मार्ग से भक्ति मार्ग में आ गए। वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद जी महाराज प्रवचन करते हैं। संन्यासी से राधावल्लभी संत बन गए प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज वृंदावन पहुंचकर हर रोज बांके बिहारी का दर्शन करते। फिर रासलीला रास आई और राधावल्लभ के कार्यक्रमों में जाने लगे। वहां घंटों खड़े रहते। एक दिन एक संत ने श्री राधारससुधानिधि से एक श्लोक पढ़ा, लेकिन महाराज उसे समझ नहीं पाए। फिर एक दिन वृंदावन की परिक्रमा करते समय एक सखी को एक श्लोक गाते हुए सुना। उसे सुनकर महाराज ठिठक गए। श्लोक ऐसा रास आया कि अपना संन्यास धर्म तोड़कर वो उस सखी के पास गए। उससे श्लोक का मतलब पूछा। सखी ने कहा- इसका मतलब समझने के लिए राधावल्लभी होना जरूरी है। इस तरह महाराज राधावल्लभी हो गए। यह संप्रदाय रस की उपासना के लिए जाना जाता है। इस रस की उपासना में कृष्ण की लीलाओं जैसे निकुंज लीला, वन विहार लीला और रासलीला का अनोखे ढंग से वर्णन किया जाता है। ……………………. ये भी पढ़ें : प्रेमानंद महाराज 40 साल से अपने गांव नहीं लौटे:जिस स्कूल में पढ़े, वो जर्जर; दोस्त बोले- संन्यासियों की सेवा के लिए स्कूल छोड़ देते थे गांव के बीच में शिव मंदिर, वहां पूजा करती महिलाएं। खेतों में गेहूं की कटाई चल रही है। लोग चबूतरे पर बैठे देश-दुनिया की बात कर रहे हैं। यह सीन है कानपुर के अखरी गांव का। यहां प्रेमानंद का जिक्र होते ही लोग तपाक से कहते हैं- कौन अनिरुद्ध पांडेय? वो तो यही के रहने वाले हैं। यहीं पास में उनका घर है। ये सामने के शिव मंदिर में ही तो पूजा किया करते थे। पढ़िए पूरी खबर… …. प्रेमानंद जी से 2023 में मिले विराट, शतकों की बारिश:संन्यास के बाद फिर वृंदावन पहुंचे, मुश्किल दौर में अध्यात्म की तरफ गए सेलिब्रिटी विराट कोहली ने 12 मई को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अगले ही दिन वह पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन में प्रेमानंद महाराज की शरण में पहुंच गए। यह पहली बार नहीं है, जब वह यहां आए। 2022-23 में विराट खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। दबाव था, संन्यास लेने का। जनवरी, 2023 में प्रेमानंद जी के आश्रम में पहली बार आए। फिर विराट ने अगस्त, 2023 में अफगानिस्तान के खिलाफ शतक मारा। उसके बाद 10 शतक लगाए। पढ़िए पूरी खबर….