एक तरफ जहां स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं का दौर चल रहा है, वहीं आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। 1 अप्रैल से नए सत्र की कक्षाएं शुरू करने, नए एडमिशन देने को लेकर भी स्कूलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। अधिकांश प्राइवेट स्कूलों ने अब तक अपने यहां पढ़ाई जाने वाली किताबों की सूची जारी नहीं की है। जबकि इन्हें स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करने से लेकर स्कूल परिसर में चस्पा करने के भी निर्देश हैं। ऐसा होने पर अभिभावक और विद्यार्थी आसानी से ये किताबें कहीं से भी खरीद सकेंगे। शहर की विभिन्न स्टेशनरी पर भी ये किताबें उपलब्ध होंगी। हर बार स्कूल संचालक स्कूल शुरू होने के दिन या उसके बाद ही ये सूची बताते हैं। शहर में ऑफर के साथ मिलती हैं कॉलेज-विश्वविद्यालय की किताबें, सिर्फ स्कूलों की नहीं शहर की विभिन्न बुक स्टॉल, स्टेशनरी आदि पर कॉलेज, विवि की किताबें भारी छूट के साथ बिकती हैं। बुक स्टॉल, स्टेशनरी आदि के संचालक बाकायदा इनका ऑफर बाहर चस्पा करते हैं। एमआरपी से बेहद कम दाम पर ये किताबें कहीं से भी खरीदी जा सकती हैं। परंतु निजी स्कूलों की किताबों को लेकर ऐसा कोई ऑफर नहीं आता। उल्टा सत्र शुरू होने के कई दिनों तक कुछ किताबें न होने पर भी स्कूल में पढ़ाई जारी रखी जाती है क्योंकि जिस चुनिंदा स्टेशनरी संचालक के पास संबंधित स्कूल गुपचुप किताबों की सूची भेजते हैं, वह पर्याप्त संख्या मंे किताबें नहीं ला पाते और ऐसी स्थिति बन जाती है। यदि सभी बड़े प्राइवेट स्कूल अभी से अपने यहां चलने वाली किताबों की सूचियां सार्वजनिक कर देंगे तो हर स्टेशनरी संचालक ये किताबें रखेगा। उनमें प्रतिस्पर्धा होगी तो विद्यार्थियों को कम दामों पर किताबें मिलेंगी। डीईओ बोले- सूची चस्पा करने के निर्देश दिए हैं जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में पहले से ही निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर के आदेश के बाद सभी निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किताबें, यूनिफार्म आदि चुनिंदा जगह से ही खरीदने के लिए अभिभावकों, विद्यार्थियों पर दबाव न बनाएं। स्कूल संचालक किताबों की सूची चस्पा करें।