ग्वालियर| रसूलाबाद हजीरा में शुक्रवार से शुरू हुई भागवत कथा के दूसरे दिन पं. प्रदीप कृष्ण शात्री ने परीक्षित जन्म और विदुर चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने कलयुग को धरती पर पांच स्थान दिए थे, उनमें से एक स्वर्ण था। जैसे ही कलयुग को स्वर्ण स्थान दिया वैसे ही कलयुग राजा के मुकुट पर सवार हो गया। इससे राजा की मति फिर गई और उन्होंने श्रंगी ऋषि के पिता के गले में मरा हुआ सांप डाल करअपमान कर दिया। भाव के बस में है भगवान: बजरंग नगर श्री बगिया बाले हनुमान महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद भागवत कथा में वृंदावन से पधारे जानकी वल्लभ शास्त्री कहा कि भगवान केवल भक्त का भाव देखते हैं। वहीं कछुआ में कुंअर महाराज मंदिर पर चल रही रामकथा के दूसरे स्वामी डॉ राम कमल दास वेदांती ने गोस्वामी तुलसीदास व उनकी प|ी र|ावती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जितना प्रेम आप मुझसे करते हो यदि उसका आधा भी श्री राम से करो तो उद्धार हो जाएगा।