भोजपुर स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय ‘महादेव’ भोजपुर महोत्सव का शुक्रवार को समापन हुआ। महाशिवरात्रि के अवसर पर हुए इस सांस्कृतिक आयोजन में लोकगायन, सुगम संगीत और पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह की अंतिम शाम की शुरुआत सागर के राजकुमार ठाकुर के लोकगायन से हुई। उन्होंने ‘मोरी जा पथ राखो गणेश बाबा’ और बुंदेलखंडी शैली में शिव बारात गीत ‘ब्यादई गौरा’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके बाद बड़वाह के संजय महाजन और उनकी टीम ने गणगौर लोकनृत्य प्रस्तुत किया। सागर के अमित घारू ने बरेदी-नौरता लोकनृत्य पेश किया, जबकि निमाड़ अंचल के 19 कलाकारों ने ‘डोला जी चाल्या चाकरी रे डोला’ और ‘थारो काई काई रूप बखानू रणुबाई’ जैसे पारंपरिक गीतों पर गणगौर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुंबई से आई पार्श्व गायिका अरुणिता कांजीलाल और नचिकेत लेले की सुगम संगीत प्रस्तुति रही। उन्होंने ‘वृंदावन का कृष्ण कन्हैया प्यारो बंसी बजावत आए रे’ जैसे भक्ति गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। भोजपुर महोत्सव ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों और लोक संस्कृति की झलकियों से दर्शकों को एक अविस्मरणीय संगीतमय अनुभव दिया। इस आयोजन में निमाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सुंदर प्रदर्शन हुआ। देखिए तस्वीरें…