जबलपुर जिला अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर एक व्यक्ति चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त होकर कई दिनों तक मरीजों का इलाज करता रहा। गुरुवार को जबलपुर जिला कोर्ट ने सुनवाई के बाद झोलाछाप डॉक्टर शुभम अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जबलपुर पुलिस को दिए। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पलक श्रीवास्तव ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 471, 120 बी, 34, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24(2), तथा मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा अधिनियम की धारा 8(1) व 8(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि शुभम अवस्थी ने आपराधिक दुर्विनियोग, छल, एवं कूटरचना जैसे गंभीर अपराध किए हैं। जिला कोर्ट ने प्रस्तुत परिवाद में उल्लिखित अपराध की घटना को सही पाया है। परिवाद के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत कोर्ट ने आवेदक की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र को स्वीकार किया। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि परिवादी शैलेन्द्र बारी द्वारा सिविल लाइन पुलिस थाने को दस्तावेजों सहित परिवाद की प्रति उपलब्ध कराई जाए और शुभम अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। याचिकाकर्ता शैलेन्द्र बारी की ओर से उनके अधिवक्ता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष तर्क दिया कि शैलेन्द्र बारी ने जाली और मनगढ़ंत डिग्री के आधार पर जबलपुर जिला अस्पताल में डॉक्टर के पद को हासिल करने से जुड़े इस गंभीर मामले की शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू नहीं की। अधिवक्ता गुप्ता का तर्क था कि विक्टोरिया अस्पताल में चिकित्सक के रूप में नियुक्ति पाने के लिए झोलाछाप डॉक्टर शुभम अवस्थी ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से आयुर्वेद स्नातक की कूटरचित डिग्री तैयार करवाई थी। इस डिग्री में अवस्थी ने यह झूठा दावा भी किया था कि उसने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, जबलपुर से पढ़ाई की है। इतना ही नहीं, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शुभम अवस्थी ने मध्य प्रदेश आयुर्वेद, यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड, भोपाल में ऑफलाइन मोड से पंजीयन क्रमांक 56970 प्राप्त किया, जबकि इस क्रमांक पर वास्तव में डॉक्टर इरम जहां मंसूरी का नाम दर्ज है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को धोखा देकर शुभम अवस्थी ने आयुष चिकित्सक का पद एवं वेतन प्राप्त किया और लगभग एक साल तक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया। झोलाछाप डॉक्टर होने के बावजूद वह अपने नाम के आगे “डॉक्टर” लिखता रहा। उसने अल्टरनेटिव सिस्टम ऑफ मेडिसिन में स्नातक व स्नातकोत्तर की फर्जी डिग्री तैयार करवाई और उसमें अपने नाम के आगे “डॉक्टर” लिखा, जो कि कानूनन गलत है। याचिकाकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराने के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई शुरू नहीं की। याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद जिला न्यायालय ने सिविल लाइन थाना प्रभारी को आदेश दिया कि शुभम अवस्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर 5 अप्रैल तक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला कोर्ट ने सुनवाई की गौरतलब है कि शैलेन्द्र बारी द्वारा उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका में उनके अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने बताया था कि जबलपुर जिला न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के समक्ष सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत याचिकाकर्ता द्वारा दायर आवेदन पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित है और पुलिस अधिकारी जांच कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं कर रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित जेएमएफसी को आदेश दिया था कि वे आवेदक द्वारा सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत दायर आवेदन पर 60 दिनों के भीतर कानून अनुसार निर्णय लें। Post navigation ‘Younis Khan said no to Pakistan cricket to work with Afghanistan’ रात में टॉयलेट जा रही युवती से दुष्कर्म:शिवपुरी में दो आरोपियों ने जबरन कमरे में ले जाकर की वारदात, मामला दर्ज