वित्त वर्ष 2024-25 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR 31 जुलाई तक फाइल करना है। ऐसे में अगर आपने अब तक ITR फाइल नहीं किया है तो जितना जल्दी हो सके कर दें। टैक्स एक्सपर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) आनंद जैन (इंदौर) बताते हैं कि ITR फाइल करने के लिए आपके पैन का आधार से लिंक होना जरूरी है। क्योंकि ऐसे पैन जो आधार से लिंक नहीं है उन्हें इनएक्टिव कैटेगरी में डाल दिया जाता है। इसे फिर से एक्टिव करने के लिए आपको इसे आधार नंबर से लिंक करना या करवाना होगा। इसके लिए सरकार 1 हजार रुपए का शुल्क ले रही है। आप आधार केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर या खुद ही आधार-पैन लिंक कर सकते हैं। अगर लिंक नहीं है तो खुद ही कर सकते हैं लिंक जिन लोगों ने पैन-आधार लिंक नहीं है, वे 1000 रुपए की फीस देकर लिंक कर सकते हैं। आप खुद भी ये काम आसानी से कर सकते हैं। इनकम टैक्स ऑफिशियल साइट के जरिए पैन-आधार लिंक किए जा सकते हैं। इन लोगों का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना है जरूरी CA आनंद जैन के मुताबिक समय रहते ITR फाइल करने से न केवल पेनल्टी से बचाव होता है, बल्कि इसके 4 और फायदे भी हैं। 1. जुर्माने से बच जाएंगे निर्धारित तारीख के भीतर ITR दाखिल नहीं करने पर आपको जुर्माना यानी पेनल्टी चुकाना पड़ सकता है। अगर किसी इंडिविजुअल टैक्सपेयर की सालाना आय 5 लाख रुपए से ज्यादा है, तब उसे 5,000 रुपए की लेट फीस देनी होगी। अगर टैक्सपेयर की सालाना कमाई 5 लाख रुपए से कम है, तब उसे लेट फीस के रूप में 1,000 रुपए भरने होंगे। समय पर ITR दाखिल करके इस जुर्माने से बचा जा सकता है। 2. नोटिस का डर नहीं रहेगा अभी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास कई सोर्सों से आपकी आय की जानकारी पहुंच जाती है, समय पर ITR दाखिल नहीं करने पर आयकर विभाग उन जानकारियों के आधार पर आपको नोटिस भेज सकता है। नोटिस की परेशानियों से बचने के लिए समय पर ITR जमा करना फायदेमंद है। 3. ब्याज की बचत इनकम टैक्स नियमों के अनुसार यदि किसी करदाता ने टैक्स नहीं चुकाया है या उस पर बनने वाले कुल टैक्स का 90% से कम चुकाया है तो उसे सेक्शन 234बी के तहत हर महीने 1% ब्याज पेनल्टी के रूप में चुकाना होगा। इस तरह समय से रिटर्न दाखिल कर इनकम टैक्स पर लगने वाले ब्याज की बचत कर सकते हैं। 4. नुकसान कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगे आयकर के नियमों के मुताबिक निर्धारित तारीख तक ITR दाखिल करने पर आप अपने नुकसान को आगे के वित्त वर्षों के लिए कैरी फारवर्ड कर सकते हैं। यानी अगले वित्त वर्षों में आप अपनी कमाई पर टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर शेयरों की बिक्री पर लॉस हुआ है, तो फिर उसे 8 सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है। हालांकि, अगर समय पर रिटर्न फाइल नहीं गया है तो लॉस को कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता और ये फायदा नहीं मिलेगा। Post navigation Sebi makes EBP mandatory for all private debt issues above Rs 20 crore विदेशी निवेशकों ने मई में ₹18,620 करोड़ निवेश किए:भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच खरीदारी; अप्रैल में ₹4,223 करोड़ इन्वेस्ट किए थे