भारतीय छात्रों की पसंद के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की चमक अब फीकी पड़ती जा रही है। लीप ग्लोबल एजुकेशन की एक रिपोर्ट कहती है कि भारतीय छात्र अब इटली, फ्रांस और न्यूजीलैंड जैसे देशों में नर्सिंग, एआई और फाइनेंस जैसे कोर्स चुन रहे हैं। इन देशों में नौकरी का रास्ता सीधा और पढ़ाई का खर्च कम है। अब इनका नया मंत्र है- डिग्री नहीं, जॉब। यूरोप भारतीय छात्रों के नए पसंदीदा ठिकाने के रूप में उभर रहा है। यूरोप में दाखिले के लिए आवेदन 7 गुना तक बढ़े इटली: +669% मुख्य कोर्स: स्टेम + हेल्थकेयर कारण: कम फीस, आसान वर्क वीसा फ्रांस: +542% मुख्य कोर्स: फाइनेंस + मार्केटिंग कारण: टेक से मैनेजमेंट में शिफ्ट (नोट: आंकड़े 2026 के स्टेम: साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथेमेटिक्स) सबसे पसंदीदा कोर्स – आवेदन में 338 गुना तक उछाल कोर्स आवेदन बढ़े मास्टर ऑफ एआई* 33,800% मास्टर ऑफ नर्सिंग साइंस 533% फिजियोथेरेपी 336% हेल्थकेयर कोर्सेज 37.6% (नोट: आंकड़े 2026 के, एक साल पहले की तुलना में * न्यूजीलैंड, स्रोत: लीप) प्राथमिकता – भारतीय छात्र अब विदेश में आखिर क्या चाहते हैं? जीआरई/ जीमैट* 58% स्कॉलरशिप 40% बैकलॉग चिंता 27% जॉब प्लेसमेंट 21% पार्ट-टाइम काम 15% रहने का खर्च 12% यूनिवर्सिटी रैंकिंग 7.8% हैदराबाद सबसे आगे फ्रांस में भारतीय टेक शहरों की दिलचस्पी हैदराबाद: +1,100% टेक प्रोफेशनल्स के मामले में सबसे बड़ा उछाल चेन्नई: +750% बदलते वैश्विक हालात के बीच आईटी रोल से प्रोडक्ट-मैनेजमेंट कैरियर की तलाश बेंगलुरु: +212% बिजनेस और फाइनेंस प्रोग्राम्स की तगड़ी डिमांड रुझान बदलने की वजह… भारतीय छात्रों के बीच जॉब को लेकर सबसे बड़ी चिंता – रुपया कमजोर होने से पढ़ाई का खर्च, लोन का बोझ बढ़ा है। इसे देखते हुए अब छात्र पूछ रहे- ‘क्या ये महंगी डिग्री नौकरी दिलाएगी?’ – नर्सिंग, एआई जैसे कोर्स इसलिए लोकप्रिय हैं क्योंकि ग्लोबल जॉब मार्केट में इनकी मांग साफ दिखती है। – इटली, फ्रांस इसलिए आकर्षक हैं क्योंकि वहां फीस कम है। माइग्रेशन पाथवे भी अन्य देशों से बेहतर हैं। 30 लाख छात्रों के सर्वे पर आधारित रिपोर्ट यूरोप, न्यूजीलैंड जैसे देशों में ब्रिटेन, यूएस सरीखे एजुकेशन हब से किफायती पढ़ाई करीब 30 लाख छात्रों के विश्लेषण पर आधारित लीप ग्लोबल एजुकेशन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप के देशों में हेल्थकेयर, मास्टर ऑफ नर्सिंग साइंस, फिजियोथेरेपी, मास्टर ऑफ एआई प्रोग्राम जैसे कोर्सेज लिए आवेदन 37.6% से लेकर 33,800% तक बढ़े हैं। एआई कोर्सेज के मामले में भारतीय छात्र न्यूजीलैंड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप और न्यूजीलैंड जैसे देशों में पढ़ाई का खर्च अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पारंपरिक एजुकेशन हब से कम है। Post navigation विदेश में पढ़ाई का अब नया फॉर्मूला:छात्र अब संस्थानों से पूछ रहे- ‘क्या इस महंगी डिग्री से नौकरी मिलेगी?’ CBSE ने 9वीं, 10वीं में थ्री लैंग्वेज अनिवार्य की:1 जुलाई से सभी स्कूलों में लागू; 10वीं बोर्ड में थर्ड लैंग्वेज का पेपर नहीं होगा