पिछले वर्ष अगस्त में हुई रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव (आरआईसी) के तमाम शोर-शराबे के बीच बेशक इंडस्ट्रीज निवेश का माहौल बना हो। लेकिन वास्तविकता में ग्वालियर अंचल में औद्योगिक निवेश रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा। बीते दो दिन तक भोपाल में चली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में ग्वालियर अंचल को निवेश की बड़ी उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, स्थिति यह रही कि ग्वालियर संभाग को एक निवेश एचवायडी टेक इंजीनियर्स और चंबल संभाग को एलिक्सर इंडस्ट्रीज निवेश का प्रस्ताव मिला है। इसमें भी एलिक्सर की यूनिट का काम पहले ही चल रहा है तथा अगस्त में ग्वालियर में हुई आरआईसी में ही इसकी घोषणा हो चुकी थी। यानी कि जीआईएस में सिर्फ एक नया निवेश प्रस्ताव एचवायडी टेक का मिला है। निवेश के मामले में पिछड़ने के लिए उद्योगपति और औद्योगिक संगठन मानते हैं कि अफसरशाही की मनमानी और क्षेत्र में अपराधियों पर लगाम कसनी जरुरी है। रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव: सीएम के आदेश के बाद भी काम नहीं संगठन बोले- अफसरशाही व गुंडागर्दी पर लगाम जरुरी पिछले कुछ वर्षों में निवेश को लेकर माहौल बदला है। बदलाव के लिए अफसरशाही पर लगाम लगानी होगी। इंडस्ट्रीज के लिए कई विभागों से काम कराने होते हैं। अफसर इसका फायदा उठाकर हैं। इसमें सुधार कराना होगा। -डॉ. प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष/ मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के आसपास कई बड़े इंडस्ट्रीज एरिया है लेकिन उनमें बड़ी इंडस्ट्री लाने की जरुरत है और इसके लिए शासन को ही गंभीर पहल करनी होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर सख्त काम एवं मॉनिटरिंग की जाए। – सुदीप शर्मा, अध्यक्ष/ लघु उद्योग भारती संघ बानमोर ग्वालियर, भिंड, मुरैना के इंडस्ट्रीज एरिया में निवेशक पड़ताल करते हैं तो इंफ्रास्ट्रक्चर एवं सुरक्षा अभाव के चलते नहीं आते। कई बार मंत्रियों, अधिकारियों से इस मुद्दे उठा चुके हैं। लेकिन समाधान नहीं हो सका। – मनीष अग्रवाल, अध्यक्ष/ लघु उद्योग भारती संघ मालनपुर Post navigation इंदौर रीजन में 29 कंपनियों ने किए सरकार से एमओयू:उद्योग, शहरी विकास, पर्यटन व हेल्थकेयर के लिए आएंगे नए ग्रुप सरकारी नौकरी:बैंक ऑफ बड़ौदा में 518 पदों पर निकली भर्ती; एज लिमिट 37 साल, सैलरी 1 लाख 20 हजार तक