नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी यानी NBFC बजाज फाइनेंस लिमिटेड की चौथी तिमाही में कुल कमाई यानी टोटल इनकम 18,469 करोड़ रुपए रही। ये पिछले साल की तुलना में 24% ज्यादा है। कंपनी की इस कमाई में ऑपरेशन से रेवेन्यू 18,457 करोड़ रुपए रहा। वहीं जनवरी से मार्च तिमाही में कंपनी का टोटल खर्च 12,830 करोड़ रुपए और टोटल टैक्स 9,830 करोड़ रुपए रहा। टोटल इनकम में से खर्च, टैक्स और अन्य खर्चे घटा दें, तो कंपनी को चौथी तिमाही में 4,480 करोड़ रुपए का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट हुआ। ये पिछले साल की तुलना में 17% बढ़ा है। बजाज फाइनेंस ने मंगलवार (29 अप्रैल) को जनवरी-मार्च तिमाही (Q4FY25, चौथी तिमाही) के नतीजे जारी किए हैं। नतीजों में आम आदमी के लिए क्या रहा? अगर आपके पास बजाज फाइनेंस के शेयर हैं, तो कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों को प्रति शेयर 12 रुपए के स्पेशल और 44 रुपए के फाइनल डिविडेंड (लाभांश) को भी मंजूरी दी है। कंपनियां अपने शेयरधारकों को मुनाफे का कुछ हिस्सा देती हैं, उसे डिविडेंड कहते हैं। कंपनी ने एक इक्विटी शेयर को दो इक्विटी शेयरों में सब-डिवीजन करने और 4:1 के रेश्यो में बोनस इक्विटी शेयर जारी करने की भी घोषणा की है। इसका मतलब है कि कंपनी हर एक इक्विटी शेयर के लिए चार बोनस इक्विटी शेयर देगी। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में बजाज फाइनेंस का मुनाफा 17% बढ़ा सालाना आधार पर तिमाही आधार पर नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। FY 2024 के मुकाबले 2025 में बजाज फाइनेंस का मुनाफा 15% बढ़ा नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में है। इस साल में अब तक शेयर का परफॉर्मेंस कैसा रहा? बजाज फाइनेंस का शेयर आज 0.13% की तेजी के साथ 9,105 रुपए पर बंद हुआ। बजाज फाइनेंस का शेयर पिछले 5 दिन में 1.2% गिरा है। 1 महीने में शेयर 5% और 6 महीने में 30% चढ़ा है। एक साल में कंपनी का शेयर करीब 34% चढ़ा है। कंपनी की मार्केट वैल्यू 5.64 लाख करोड़ रुपए है। कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। Post navigation US stocks open mixed, weighed down by Trump’s tariff uncertainity इंडसइंड बैंक के CEO सुमंत कठपालिया ने इस्तीफा दिया:बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ी के बाद फैसला लिया; 12 साल तक मैनेजमेंट का हिस्सा रहे