संघ का पूरा नेतृत्व दिल्ली में, संगठन सरकार और मुख्यमंत्रियों में भी बदलाव होगा क्या भारतीय जनता पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा यह मुद्दा सूची में सबसे ऊपर है संघ और भाजपा ने मुख्यमंत्रियों के काम काज की भी समीक्षा कर ली है भाजपा में केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री बदल सकते हैं आपको नए मुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री शपथ लेते हुए दिखाई दे सकते हैं बहुत जल्दी, यह संकेत दिल्ली से मिल रहे है जहां इस समय पूरा संघ का केंद्रीय नेतृत्व मौजूद है और संगठन – सरकार के साथ निरंतर बैठक कर रहा है। दिल्ली में संघ के इतने बड़े पदाधिकारीयो के एक साथ आने की क्या जरूरत थी लेकिन फैसला किया गया कि जितना ज्यादा से ज्यादा लोगों से एक ही जगह पर डिस्कशन हो सके और किसी एक राय से जल्द किसी फैसले पर पहुंचने कि सहमति बन सके इसलिए दिल्ली में एक साथ सब इकट्ठा हुए हैं। संघ और भाजपा में जिस तरह से काम चल रहा था खासतौर से राजनीतिक फैसलों के मामले में अब वह संघ और भाजपा की आम सहमति से होंगे और विचार विमर्श के बाद ही होंगे ऐसा नहीं होगा कि फैसला लेने के बाद सूचना संघ को दे दी जाएगी ऐसा भी नहीं होगा कि संघ चुपचाप जो भी फैसला होगा उसको स्वीकार कर लेगा संघ अब अपनी शक्ति को सेट करना चाहता है प्रधानमंत्री की ओर से यह तैयारी पहले से शुरू हो गई है जिसके अंतर्गत वोह हर मंत्री के कामकाज की समीक्षा कर रहे है तो इस बात की बड़ी प्रबल संभावना है कि कुछ मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से हटाया जा सकता है ऐसे मंत्रियों में से कुछ को संगठन के काम में भेजा जा सकता है और कुछ को हो सकता है कोई काम ना मिले इसके अलावा मुख्यमंत्रीयो के चयन में भी कई चीजों का प्रशासनिक अनुभव राजनीतिक अनुभव सामाजिक संदेश इन सब बातों को ध्यान में रखा जाएगा भाजपा और संघ में बेहतर समन्वय और बेहतर सामंजस्य के लिए यह एक्सरसाइज हो रही है क्योंकि पिछले कुछ समय में कम्युनिकेशन गैप की कमी आ गई थी और पहले जो संघ और भाजपा में संवाद होता था उस तरह से संवाद पिछले कुछ समय से नहीं हो रहा था। दोनों ने यह महसूस किया है लोकसभा चुनाव के बाद कि दोनों का काम एक दूसरे के बिना नहीं चल सकता क्योंकि संघ जिस परिस्थिति में पहुंच गया उसका यह शताब्दी वर्ष चल रहा है बहुत ज्यादा सत्ता पर निर्भर हो गया और सत्ता के लिए भाजपा की संघ पर निर्भरता कहीं से कम नहीं हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता उनकी स्वीकार्यता के कारण राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को संघ की ताकत की शायद इतनी जरूरत नहीं है लेकिन संघ की ताकत की जरूरत है इससे भाजपा इनकार नहीं कर सकती उसने हाथ जला कर देख लिया 2024 में जो हुआ इसी वजह से हुआ वह एक बयान आप याद कीजिए जगत प्रकाश नड्डा का राष्ट्रीय अध्यक्ष है कि अब हमें संघ की जरूरत नहीं है और फिर चुनाव नतीजे के जरिए सब पता चल गया किसे किसकी जरूरत है। दोनों साथ मिलकर बड़ी ताकत बनते हैं अलग-अलग चलकर दोनों कमजोर होते हैं आप मान कर चलिए की काफी समय बाद ऐसा होने जा रहा है कि पूरे समन्वय के साथ एक साथ संघ और भाजपा में बड़े फैसले होने जा रहे हैं। Post navigation Namkum’s Son Remarkable Accomplishments, In Water Resources Management Acknowledged on Global Platforms Former Karnataka DGP Om Prakash Killed by Wife Pallavi.