भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के जाति प्रमाणपत्र के मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें छानबीन समिति की ओर से बताया गया कि उनके जाति संबंधी प्रमाणपत्र कलेक्टोरेट में नहीं मिले हैं। इस बीच समिति अध्यक्ष अजीत केसरी भी 28 को सेवानिवृत हो गए। अभी नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके चलते कोर्ट ने 17 मार्च तक निर्णय लेने का अंतिम अवसर दिया है। 4 फरवरी को अजीत केसरी (प्रमुख सचिव पिछड़ा और अल्पसंख्यक विभाग), सौरभ कुमार सुमन (पिछड़ा और अल्पसंख्यक विभाग कमिश्नर, घनश्याम धनगर (एसडीएम जूनी इंदौर) ,वार्ड 65 के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा सहित अन्य को हाई कोर्ट की अवमानना के मामले में 5 हजार रुपए का जमानती वारंट जारी किया गया था। दो दिन बाद सभी ने कोर्ट से माफी मांगते हुए 1 हफ्ते में निर्णय लेने की गुहार लगाते हुए वारंट वापस लेने के लिए अर्जी लगाई थी। इस पर कोर्ट ने 17 फरवरी तक की मोहलत दी थी। 17 फरवरी को फिर कुछ दिन की मोहलत मांगी गई तो कोर्ट ने 3 मार्च को सुनवाई तय की। आज सुनवाई में समिति की ओर से स्पष्ट किया गया कि कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त पत्र के मुताबिक कमलेश कालरा के जाति से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। समिति अध्यक्ष अजीत केसरी 28 को सेवानिवृत हो गए हैं, इसलिए निर्णय नहीं लिया जा सका। इसके लिए अंतिम अवसर प्रदान किया जाए। नए अध्यक्ष एक-दो दिनों में चार्ज ले लेंगे। इस पर कोर्ट ने अंतिम अवसर देते हुए अगली तारीख 17 मार्च रखी है। दरअसल कांग्रेस प्रत्याशी रहे सुनील यादव की याचिका पर वारंट जारी हुआ था। कालरा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र से पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित वार्ड से चुनाव लड़ने की शिकायत है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट मनीष यादव और करण बैरागी ने तर्क रखे कि कोर्ट के आदेश के 6 माह बाद भी पार्षद कालरा के जाति प्रमाण पत्र की जांच में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है। इसमें छानबीन समिति लंबे समय से जांच कर रही है लेकिन सारे तथ्य आ जाने के बाद भी निर्णय नहीं कर रही है।