बेलदार से असिस्टेंट राजस्व अधिकारी बने राजेश परमार के यहां ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने शुक्रवार को छापा मारा था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार छापा मार कार्यवाही में ईओडब्ल्यू को राजेश के यहां से 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेनामी संपत्ति मिली है। इसमें प्रॉपर्टी, कैश, बैंक खाते, लॉकर सहित सोना और चांदी मिला है। ईओडब्ल्यू की राजेश परमार के यहां कार्यवाही आज (शनिवार) भी जारी है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अधिकारियों को राजेश परमार के यहां से अभी और भी बेनामी संपत्ति व अन्य जानकारी सामने मिलने की संभावना है। ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वर यादव ने बताया कि राजेश परमार के यहां आज लॉकर खोलने व उनकी जांच करने की कार्यवाही की जाएगी। इसमें और भी दस्तावेज व अन्य बेनामी संपत्ति का ब्योरा सामने आ सकता है। लॉकर खुलने के बाद कुल संपत्ति का वैल्यूएशन किया जाएगा। सूत्रों की माने तो परमार के पास महू में भी जमीन है। जिसके दस्तावेज लॉकर में मिल सकते हैं। ईओडब्ल्यू को कल (शुक्रवार) तक कार्यवाही में एक बंगला, 4 फ्लैट और 2 प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं। राजस्व नुकसान पहुंचाने के आरोप में हुआ सस्पेंड बता दें कि राजेश परमार नगर निगम के जोन-16 में एआरओ के पद पर कार्यरत था। उस पर संपत्ति कर की बकाया राशि को कम दिखाकर नगर निगम को राजस्व नुकसान पहुंचाने का आरोप है। वह करदाताओं से आंशिक भुगतान लेकर बकाया खाता शून्य कर देता था और इसके बदले मोटी रकम वसूलता था। शिकायतों के आधार पर निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने कुछ दिन पहले ही उन्हें निलंबित कर दिया था। नौकरी के दौरान उसने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर घर और प्लॉट समेत अन्य प्रॉपर्टी खरीदी। सैलरी से 30 गुना ज्यादा संपत्ति का आकलन ईओडब्ल्यू डीएसपी पवन सिंघल ने बताया कि राजेश परमार 28 साल पहले बेलदार के पद पर भर्ती हुआ था। जिसके बाद वह सहायक राजस्व अधिकारी बन गया। उसके खिलाफ टैक्स में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। राजेश परमार का अब तक का मूल वेतन 40 लाख रुपए होता है। सूत्रों की मानें तो राजेश परमार ने अपने वेतन से 30 गुना ज्यादा बेनामी संपत्ति इकठ्टा की है। इसके पास 10 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति मिली है। बैंक लॉकर खुलने के बाद ही परमार की असल बेनामी संपत्ति का आंकड़ा सामने आएगा। पांच बार विदेश यात्रा, फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर भी रह चुका छापेमारी में बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और कैश बरामद हुआ है। इसका वजन और मूल्यांकन कराया जा रहा है। इसके अलावा बैंक खातों और लॉकर की जानकारी भी निकाली जा रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि परमार ने सरकारी नौकरी में रहते हुए पांच बार विदेश यात्रा की है। इस बारे में भी शिकायत दर्ज की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि परमार पहले फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर भी रह चुका है। अक्टूबर 2024 में हुई थी भ्रष्टाचार की शिकायत वार्ड 39 की कांग्रेस पार्षद रुबीना खान ने 20 अक्टूबर 2024 को परमार के खिलाफ निगमायुक्त से शिकायत की थी। रुबीना ने आरोप लगाया था कि वह दरोगा है, लेकिन प्रभारी एआरओ बन गया है। जोन-19 पर बेटरमेंट शुल्क की कम वसूली कर भ्रष्टाचार कर रहा है। परमार पर बिना अनुमति विदेश यात्रा करने का भी आरोप है। रुबीना ने महापौर, आयुक्त, राजस्व समिति प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों को सप्रमाण शिकायत की है। उनका आरोप है कि परमार पद के योग्य नहीं है और उसे तत्काल बर्खास्त कर उसके कार्यकाल की जांच करवाई जाए। अभय राठौर और राजकुमार भी लपेटे में ईओडब्ल्यू के निशाने पर पहले भी नगर निगम के अधिकारी रहे हैं। यह तीसरा मौका है, जब किसी नगर निगमकर्मी के यहां छापा पड़ा है। इसके पहले एरोड्रम इलाके में नगर निगम के अधिकारी राजकुमार के यहां छापा पड़ा था। उसके पास से भी करोड़ों रुपए की काली कमाई का खुलासा हुआ था। अधिकारियों ने उसकी शिकायत की थी, जिसके बाद छापा पड़ा था। नगर निगम के इंजीनियर अभय राठौर के यहां भी ईओडब्ल्यू की टीम ने ही कार्रवाई की थी। उसके पास से भी बड़ी मात्रा में काली कमाई मिली थी। छापे के बाद ही राठौर के कारनामे उजागर हुए थे। ड्रेनेज घोटाले में भी उसकी अहम भूमिका सामने आई थी। उसके खिलाफ एमजी रोड थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ था। यूपी से गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। अभी तक जमानत नहीं हो पाई है। Post navigation BigBasket plans to list in two years इंदौर में सोना 350, चांदी 1200 रुपए सस्ती:मुहूर्त में किशमिश ₹240 किलो बिकी, तुवर दाल में ₹100 की गिरावट; जानिए मंडी भाव