भारत की रिटेल महंगाई अप्रैल में 3.2% रहने की उम्मीद है। आज रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। खाने-पीने के सामान की कीमतों में लगातार नरमी के कारण रिटेल महंगाई फरवरी से RBI के लक्ष्य 4% से नीचे है। यदि अनुमान सही साबित होता है, तो यह पिछले 5 साल में महंगाई में लगातार कमी का सबसे लम्बा सिलसिला होगा। इससे पहले मार्च महीने में रिटेल महंगाई 3.34% रही थी। ये महंगाई का 5 साल 7 महीने का निचला स्तर था। मार्च में रिटेल महंगाई महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। CPI से तय होती है महंगाई एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है। कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मैन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी होती हैं, जिनकी रिटेल महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका होती है। करीब 300 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है। Post navigation सोना ₹866 बढ़कर ₹93,942 पर पहुंचा:चांदी ₹624 महंगी होकर ₹96,350 किलो बिक रही, इस साल ₹17,780 महंगा हो चुका है गोल्ड Paytm shares slide 5 per cent as Ant Financial offloads 4.1 per cent stake via block deal