एअर इंडिया लिमिटेड अमेरिकी कंपनी बोइंग के उन विमानों को खरीदने पर विचार कर रही है, जिनके शिपमेंट को चीनी एयरलाइन कंपनियों ने लेने से इनकार कर दिया है। पिछले हफ्ते अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर के बीच चीन ने अपनी एयरलाइन कंपनियों को बोइंग से नए विमानों की डिलीवरी नहीं लेने के आदेश दिए थे। चीनी सरकार ने यह आदेश अमेरिका के 145% टैरिफ के जवाब में जारी किया था। तब चीन ने अमेरिका में बनने वाले विमान के पार्ट्स और डिवाइसेस की खरीद रोकने का आदेश भी दिया था। एयरक्राफ्ट के टॉप सप्लायर्स में से एक बोइंग बोइंग एयरप्लेन एक अमेरिकी कंपनी है, जो एयरप्लेन, रॉकेट, सैटेलाइट, टेलीकम्युनिकेशन इक्विपमेंट और मिसाइल बनाती है। कई देशों की एयरलाइंस कंपनियां बोइंग के बनाए गए प्लेन का इस्तेमाल करती हैं। बोइंग अमेरिका की सबसे बड़ी एक्सपोर्टर कंपनी है और यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी डिफेंस डील करने वाली कंपनी भी है। बोइंग ने 2015 से 2020 तक चीन को 668 एयरक्राफ्ट डिलीवर किए चीन का बोइंग के साथ बिजनेस काफी चैलेंजिंग रहा है। इस तनाव का असर 2019 के बाद के डिलीवरी पर काफी देखने को मिला है। चीन बोइंग के बड़े ग्राहकों में से था। अमेरिकी कंपनी ने 2015 और 2020 के बीच 668 विमान चीन को बेचे। 2017 में एक बड़े डील में चाइना एविएशन सप्लाइज होल्डिंग कंपनी ने 37 बिलियन डॉलर के 300 विमानों का ऑर्डर दिया। बोइंग के अनुमान के मुताबिक, चीन का एविएशन सेक्टर 5.2% के सालाना रेट से बढ़ रहा है। 2043 तक इसे 8,830 नए विमानों की जरूरत होगी।