सेलिब्रिटी शेफ विकास खन्ना को TIME मैगजीन ने 2026 में दुनिया के 100 इन्फ्लुएंशल लोगों की लिस्ट में शामिल किया है। वे इस लिस्ट में शामिल 3 भारतीय मूल की हस्तियों में शामिल हैं। TIME मैगजीन ने विकास खन्ना को ‘मैन ऑफ एक्सट्राऑडिनरी हार्ट’ यानी बड़े दिल वाला इंसान बताया है। साथ ही उन्हें समाजसेवा और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए सराहा गया है। विकास खन्ना ने इसे भारत के लिए गर्व का पल बताया है। फेमस शेफ विकास खन्ना न सिर्फ शेफ हैं बल्कि लेखक, फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी हैं। विकास इंडियन क्विजीन को अपने ऑथेंटिक रूप में इंटरनेशनल मंचों पर ले जाने के लिए जाने जाते हैं। क्लबफुट कंडिशन की वजह से स्कूल में बुली हुए विकास खन्ना 1971 में पंजाबी परिवार में क्लबफुट कंडिशन के साथ जन्मे। ये एक तरह का जन्मजात फुट डिफॉर्मिटी है। इसमें पैर की नसें छोटी होने के कारण पैर अंदर और नीचे की ओर मुड़ जाता है, जिससे जमीन पर पैर सीधे नहीं रख पाते। इसे ठीक होने में करीब 13 साल का वक्त लगा। ऐसे में स्कूल और आस-पड़ोस में बच्चे साथ नहीं खेलते। स्कूल में बच्चे उन्हें बुली करते। विकास बोले- ‘बीजी ने भूख बांटना सिखाया’ इन सबसे दूर वे घर में सुकून पाते। घर पर मां और बीजी (दादी) के साथ अपना ज्यादातर समय बिताते। बहुत कम उम्र से ही झाड़ू-बर्तन जैसे घर के छोटे-मोटे काम सीखने लगे थे। बीजी का खाना बनाने के प्रति गहरा लगाव था, जिसकी वजह से खाना बनाने की ओर उनका रुझान बढ़ा। बहुत कम उम्र से ही वे खाना बनाने लगे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘बीजी से मैंने भूख की ताकत सीखी है।’ 1984 में अमृतसर दंगों के बीच पले-बढ़े विकास को भूख और खाने की अहमियत अच्छे से पता थी। ऐसे माहौल ने उन्हें मिल-बांटकर खाना सिखाया। एक इंटरव्यू में वे कहते हैं, ‘बीजी ने मुझे भूख बांटना सिखाया। उन्होंने मुझे शांति और अनुशासन भी सिखाया। जब मेरी दादी खाना बनाती थीं, तो माहौल हमेशा शांत, लगभग ध्यानमग्न जैसा होता था।’ घर और गुरुद्वारे में काम कर खाना बनाना सीखा बीजी अक्सर उन्हें गुरुद्वारे ले जाती, जहां वे लंगर में सेवा देते। कभी रोटियां बेलते, सब्जियां काटते, तो कभी बर्तन धोकर या लंगर परोसकर सेवा करते। ऐसे खाना खिलाने के प्रति उनका प्यार और गहराता गया। वे 12-13 की उम्र से ही पास के छोटे ढाबों पर काम करने लगे थे, ताकि घर को थोड़ी आर्थिक रूप से सपोर्ट कर सकें। 10वीं क्लास में स्वेटर बुनकर 10 हजार रुपए कमाए, बिजनेस शुरू किया 1990 की बात है, जब वे 10वीं क्लास में थे। तब छुट्टियों में दादी से बुनाई सीखी और लोगों के लिए स्वेटर बुनकर उन्होंने 10 हजार रुपए जमा किए थे। इन्हीं पैसों से शादी-पार्टीज होस्ट करने के लिए ‘लॉरेंस गार्डन्स’ बैंक्वेट्स का बिजनेस शुरू किया था। इन पैसों से 24 कुर्सियां और दो बड़े पतीले खरीदे थे। पापा ने तंदूर दिया था जिसके बाद घर के पिछले हिस्से में खाली जगह पर ये बैंक्वेट्स तैयार किया था। लेकिन पढ़ाई के लिए उन्हें जल्द मुंबई जाना पड़ा। इस दौरान बिजनेस अच्छा चला। हालांकि, विकास इससे खुश नहीं थे क्योंकि मार्केट में इसकी कोई खास ब्रांड वैल्यू नहीं थी। ये सब उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था। न्यूयॉर्क में बर्तन धोए, आज वहीं खुद का रेस्टोरेंट 2000 में वे अमेरिका गए। वहां शुरुआत में कोई काम नहीं मिल रहा था। वे शेफ का काम खोज रहे थे लेकिन उन्हें एक छोटे रेस्टोरेंट में बर्तन धोने का काम मिला। ऐसे में सर्वाइव करने के लिए उन्होंने वो काम पकड़ लिया था। यहीं (न्यूयॉर्क) 2010 में उन्होंने रेस्टोरेंट मालिक राजेश भारद्वाज के साथ पार्टनरशिप में रेस्टोरेंट ‘जुनून’ खोला। यहां वे ऑथेंटिक इंडियन फूड परोसते हैं। इस रेस्टोरेंट को 2011 में लॉन्च के तुरंत बाद ही मिशेलिन स्टार मिला था। और ये न्यूयॉर्क का लगातार 8 सालों (2018) तक ये मिशेलिन रेटेड रेस्टोरेंट रहा था। लगातार 8 सालों तक मिशेलिन रेटेड रेस्टोरेंट यहीं (न्यूयॉर्क) 2010 में उन्होंने रेस्टोरेंट मालिक राजेश भारद्वाज के साथ पार्टनरशिप में रेस्टोरेंट ‘जुनून’ खोला। यहां वे ऑथेंटिक इंडियन फूड परोसते हैं। इस रेस्टोरेंट को 2011 में लॉन्च के तुरंत बाद ही मिशेलिन स्टार मिला था। और ये न्यूयॉर्क का लगातार 8 सालों (2018) तक ये मिशेलिन रेटेड रेस्टोरेंट रहा था। मिशेलिन स्टार कलिनरी वर्ल्ड में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है, जो किफायदी दामों पर क्वालिटी फूड के लिए मिलता है। रेस्टोरेंट का डिजाइन भंसाली फिल्म से इंस्पायर्ड जुनून रेस्टोरेंट का डिजाइन संजय लीला भंसाली की फिल्म देवदास से इंस्पायर्ड है। विकास ने एक इंटरव्यू में बताया कि ‘शुरू में जुनून का डिजाइन एक मॉडर्न इंडियन स्टाइल का सोचा था। लेकिन जब मैंने संजय लीला भंसाली की देवदास देखी, तो सच में मैं दंग रह गया। फिल्म देखने के बाद लगा जैसे हर फ्रेम इंडिया के बारे में कुछ नया समझा रहा हो। सब कुछ इतनी बारीकी और खूबसूरती से बनाया गया था।’ इसके बाद उन्होंने तय किया कि रेस्टोरेंट को पूरे भारतीय स्टाइल में सजाएंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘जगह ऐसी लगनी चाहिए जैसे कोई शाही महल हो… और अंदर कदम रखते ही लोगों के मुंह से बस एक ही बात निकले-‘ओ माय गॉड!” महामारी में लोगों की मदद के लिए रेस्टोरेंट शुरू किया 2019 में विकास ने दुबई के JA लेक व्यू होटल में ‘किनारा’ रेस्टोरेंट लॉन्च किया। अगस्त 2020 में दुबई के JA द रिजॉर्ट में ‘एलोरा बाय विकास खन्ना’ की शुरुआत की। ये एक सीजनल फाइन-डाइनिंग पॉप-अप रेस्टोरेंट हुआ करता था जो अब बंद हो चुका है। इसे उन्होंने कोविड महामारी के दौर में शुरू किया था ताकि लोगों को सस्ता और अच्छा खाना मिल सके। कोविड में ‘फीड इंडिया इनिशिएटिव’ के तहत सरहद पार से मदद भेजी अप्रैल 2020 में कोविड महामारी के दौरान उन्होंने ‘फीड इंडिया इनिशिएटिव’ लॉन्च किया था। इसके तहत 135 से ज्यादा शहरों में लाखों अंडरप्रिवलेज्ड लोगों को 50 मिलियन फूड पैकेट्स उपलब्ध कराए। इस पहल के तहत लॉकडाउन के दौरान संघर्ष कर रहे लोगों को सूखा राशन, खाना, सैनिटरी पैड और जूते दिए गए थे। ‘बंगलो’ रेस्टोरेंट को मिशेलिन बिब गौर्मंड अवॉर्ड मिला 23 मार्च 2024 को न्यूयॉर्क के ईस्ट विलेज में रेस्टोरेंट मालिक जिमी रिजवी के साथ पार्टनरशिप में ‘बंगलो’ रेस्टोरेंट लॉन्च किया। इसे विकास ने इंडियन फैमिलीज की पुरानी रसोई और विंटेज क्लबों की याद दिलाने वाले अंदाज में डिजाइन करवाया है। लॉन्च के कुछ ही समय बाद से ये रेस्टोरेंट शहर की सबसे मुश्किल बुकिंग्स में से एक बन गया था। इसे साल 2024 में मिशेलिन बिब गौर्मंड अवॉर्ड मिला था। साथ ही ये रेस्टोरेंट 2024 में न्यूयॉर्क टाइम्स के बेस्ट न्यू रेस्टोरेंट्स की लिस्ट में शामिल था। कुकिंग शोज से भारतीय घरों में पहचान बनाई विकास खन्ना की लोकप्रियिता का बड़ा हिस्सा ‘मास्टरशेफ इंडिया’ और दूसरे शोज से जुड़ा है। उन्होंने कुकिंग शोज के जरिए हर भारतीय घर में अपनी पहचान बनाई है। 2011 में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ के दूसरे सीजन को होस्ट और जज करना शुरू किया था। उन्होंने 2017 तक ‘मास्टरशेफ इंडिया’ के 6 सीजन को जज किया है और 2025 में ‘सेलिब्रिटी मास्टरशेफ इंडिया’ के पहले सीजन को भी जज किया। हालांकि, इससे पहले 2009 में उन्होंने US टेलीविजन प्रोग्राम ‘हेल्स किचन’ के फिनाले में बतौर गेस्ट जज टेलिविजन की दुनिया में डेब्यू किया था। 2014 में ‘मास्टरशेफ ऑस्ट्रेललिया’ के छठे सीजन में बतौर गेस्ट जज अपियर हुए थे। उसी साल फॉक्स लाइफ इंडिया के लिए कुकिंग कॉम्पिटीशन सीरीज ‘ट्विस्ट ऑफ टेस्ट’ को होस्ट किया था। 37 कुकबुक्स लिख चुके 2005 में ‘द क्विजिन ऑफ गांधी’ कुकबुक लिखकर बतौर लेखक डेब्यू किया। अब तक 37 कुकबुक्स लिख चुके। उनकी चर्चित किताबों में ‘स्पाइस स्टोरी ऑफ इंडिया’ (2006), ‘फ्लेवर्स फर्स्ट: एन इंडियन शेफ्स कलिनरी जर्नी’ (2011), ‘इंडियन हार्वेस्ट: क्लासिक एंड कंटेम्पररी वेजिटेरियन डिशेज’ (2015) और दुनिया की सबसे महंगी कुकबुक उत्सव: अ कलिनरी एपिक ऑफ इंडियन फेस्टिवल्स (2017) शामिल है। दुनिया की सबसे महंगी कुकबुक लिखी विकास की 37 लिखे किताबों में सबसे खास है उत्सव: अ कलिनरी एपिक ऑफ इंडियन फेस्टिवल्स(2017)। ये 1200 पन्नों की किताब है, जिसे ब्लूम्सबरी ने प्रकाशित किया है। इसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों के 300 से ज्यादा त्योहारों से जुड़े व्यंजन शामिल हैं, साथ में खूबसूरत तस्वीरें और कहानियां भी हैं, जो मिल-बांटकर खाने की भारतीय परंपरा को उभारती हैं। इसकी सबसे खास बात ये है कि इसके सिर्फ 12 लिमिटेड एडिशन कॉपी ही बनाई गई थीं, वो भी गोल्ड लीफ और कस्टम बाइंडिंग के साथ। इनमें से एक कॉपी 30 लाख रुपए में नीलाम हुई थी, और इसी वजह से इसे दुनिया की सबसे महंगी कुकबुक है। ये किताब उन्होंने फरवरी 2017 में क्वीन एलिजाबेथ को गिफ्ट की थी। इंटरनेशनल लीडर्स और अमेरिकी प्रेसिडेंट्स को होस्ट कर चुके विकास ने अपने करियर में कई इंटरनेशनल लीडर्स और अमेरिक प्रेसिडेंट्स को होस्ट किया है। उनके लिए हाई-प्रोफाइल मौकों पर खाना पकाया है। उन्होंने 2022 के एक इंटरव्यू में बताया कि बराक ओबामा के कार्यकाल में उन्होंने व्हाइट हाउस स्टेट डिनर में सात्विक और हिमालयन डिनर बनाया। ट्रंप के समय में भी न्यूयॉर्क और डिप्लोमैटिक सर्किट के हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में उन्होंने कुक किया। साथ ही पोप फ्रांसिस, दलाई लामा, प्रधानमंत्री मोदी जैसे कई बड़े लीडर्स के लिए भी खाना पकाया है। स्टोरी – सोनाली राय ————————– ये खबर भी पढ़ें… नोएडा में 8वें दिन भी फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन:ग्रुरुग्राम में सैलरी रिवीजन के बाद भी विरोध; बिहार, गुजरात में भी कर्मचारियों की हड़ताल नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन 8वें दिन भी जारी है। 8 दिन पहले, 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर लगभग 42 हजार कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। पूरी खबर पढ़ें… Post navigation हाथ-पैर से कुछ काम नहीं कर सकता,10वीं में 100% आए:लेटे-लेटे करता है पढ़ाई; गोद में उठाकर स्कूल लेकर जाते हैं पिता आज की सरकारी नौकरी:RBI में इंजीनियर्स की भर्ती; एलआईसी हाउसिंग फायनेंस में 180 वैकेंसी, महानदी कोलफील्ड्स में 500 ओपनिंग्स