‘सत्या’-के-सेट-पर-मुझे-कुर्सी-तक-नहीं-मिली:सुशांत-सिंह-ने-शेयर-किया-शूटिंग-का-अनुभव,-राम-गोपाल-वर्मा-के-असिस्टेंट-ने-दी-थी-गाली

राम गोपाल वर्मा की 1998 की फिल्म ‘सत्या’ भारतीय सिनेमा के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म काम करने वाले एक्टर एक्टर सुशांत सिंह हाल ही में फिल्म की शूटिंग के अनुभव शेयर किए। डिजिटल कमेंट्री से बातचीत में सुशांत ने कहा कि उनका पहला दिन सेट पर मेकअप ट्रायल में ही निकल गया। मेकअप टीम उनके चेहरे पर निशान कहां होना चाहिए, यह तय कर रही थी। लगभग आधा दिन इसी में लग गया। उन्होंने बताया कि जब आखिरकार शूटिंग शुरू हुई, तो उनके किरदार के बारे में सौरभ शुक्ला और अनुराग कश्यप ने जानकारी दी। दोनों उस फिल्म के लेखक थे। उन्होंने कहा कि यह किरदार एक छोटे गुंडे का है, जिसने कभी चाकू भी नहीं देखा। सुशांत ने बताया, “मैं फर्श पर बैठा था। पौधों के पास ईंटों पर। किसी ने कुर्सी तक नहीं दी। मुझे कोई नहीं जानता था। मैं सिर्फ एक स्ट्रगलिंग एक्टर था, जिसे एक गुंडे का रोल मिला था।” जब शूटिंग शुरू हुई और राम गोपाल वर्मा ने ‘एक्शन’ कहा, तो सुशांत ने एक्टिंग शुरू कर दी, लेकिन उन्होंने ‘कट’ नहीं कहा। सुशांत ने सीखा हुआ था कि जब तक ‘कट’ न हो, तब तक किरदार में रहना चाहिए। इसलिए वह करते रहे। उन्होंने बताया, “काफी देर बाद कट बोला गया। तब रामू खुश भी हुए और बाद में मुझे डांटा भी। लेकिन उसी से उन्हें आइडिया मिला कि कट के बाद भी क्या-क्या हो सकता है।” पहले टेक में परफॉर्मेंस के दौरान सुशांत का पायजामा फट गया पहले टेक के दौरान सुशांत ने इतना जोर से परफॉर्म किया कि उनका पायजामा फट गया। उन्होंने कहा, “इसके बाद दूसरा टेक होना था। असिस्टेंट तौफीक भाई ने गाली दी और बोले, ‘किसने बोला गिरने को? अब दूसरा पायजामा कहां से लाऊं?’” सुशांत ने बताया कि बाद में राम गोपाल वर्मा ने इस घटना का जिक्र अपनी किताब में भी किया। उन्होंने लिखा, “क्योंकि मैंने कट नहीं कहा और एक्टर सीन करता रहा, मुझे देखने का मौका मिला कि कट और एक्शन के बीच क्या हो सकता है। यही सत्या की बेसिक स्टाइल बन गई।”