जिसकी आय उसी पर टैक्स। इस संबंध में आयकर विभाग ने हाल ही में क्लबिंग प्रोविजंस पर ब्रोशर जारी किया है। दरअसल, टैक्स देनदारी कम करने के इरादे से टैक्सपेयर्स पत्नी, बच्चों, बहू, सास-ससुर आदि के नाम पर निवेश करते हैं, ताकि आय को कृत्रिम रूप से बांटकर टैक्स बेनीफिट लिया जा सके। क्लबिंग प्रोविजंस का मकसद इस तरह की टैक्स चोरी रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे निवेश से हुई आय पर टैक्स प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने वाले पर लगे। ऐसे में परिवार के सदस्यों के बीच वित्तीय लेनदेन के दौरान क्लबिंग प्रोविजंस को ध्यान में रखना चाहिए। अगर आप बहू को संपत्ति गिफ्ट करते हैं तो इससे होने वाली आय आपकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ी जाएगी Post navigation Solar capacity additions to accelerate with 85-90 GW projected for FY26-27 PPF में टैक्स छूट के साथ ज्यादा ब्याज:इसमें 7.1% ब्याज मिल रहा, ₹1.50 लाख का निवेश टैक्स फ्री; जानें इससे जुड़ी खास बातें